पिछले कई दिनों से जे.जे. अस्पताल में दवाइयों की किल्लत... अब दूर होगा दवाइयों का अकाल- डॉ. पल्लवी साफले

For the past several days JJ. The shortage of medicines in the hospital... Now the famine of medicines will go away - Dr. Pallavi Safale

पिछले कई दिनों से जे.जे. अस्पताल में दवाइयों की किल्लत... अब दूर होगा दवाइयों का अकाल- डॉ. पल्लवी साफले

जे.जे. अस्पताल को दवाइयों की किल्लत के चलते फजीहत झेलनी पड़ रही थी। लेकिन लगता है अब इससे निजात पाने का मार्ग अस्पताल प्रशासन ने ढूंढ़ निकाला है। इस संदर्भ में अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी साफले ने बताया कि अपने अधिकार का उपयोग कर एक महीने की दवाइयों सहित गैर-सर्जिकल वस्तुओं को खरीदा जाएगा, वहीं सामान के भंडारण पर नजर रखने के लिए तीन डॉक्टरों की टीम का भी गठन किया गया है।

मुंबई : बीमार का हाल तो दवाओं से ही ठीक होता है। मगर कुछ समय पहले मुंबई के सबसे बड़े व प्रतिष्ठित जे.जे. अस्पताल को दवाओं की किल्लत से जूझना पड़ा था। ऐसे में मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। मगर अब अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी साफले के प्रयासों से इस समस्या का हल निकल गया है और अब मुंबई के इस सबसे प्रमुख अस्पताल में मरीजों के लिए दवाओं का फुल डोज उपलब्ध है।

गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से जे.जे. अस्पताल को दवाइयों की किल्लत के चलते फजीहत झेलनी पड़ रही थी। लेकिन लगता है अब इससे निजात पाने का मार्ग अस्पताल प्रशासन ने ढूंढ़ निकाला है। इस संदर्भ में अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी साफले ने बताया कि अपने अधिकार का उपयोग कर एक महीने की दवाइयों सहित गैर-सर्जिकल वस्तुओं को खरीदा जाएगा, वहीं सामान के भंडारण पर नजर रखने के लिए तीन डॉक्टरों की टीम का भी गठन किया गया है। ऐसे में अस्पताल में दवाओं की किल्लत काफी हद तक अब दूर हो गई है।

बता दें कि हाफकिन की तरफ से पूरी दवाएं खरीदी जाती हैं। पूरे बजट में से ९० प्रतिशत खरीदी हाफकिन से करनी होती और १० प्रतिशत लोकल खरीदारी का अधिकार होता है। इसलिए जीवनरक्षक और आपातकाल में उपयोग होनेवाले ड्रग लोकल पर्चेस से खरीदे जाते हैं। हालांकि विभिन्न कारणों के चलते दवाओं की खरीदी में देरी होने की बात सामने आई है।

जे.जे. अस्पताल में दवाइओं की अनुपलब्धता के चलते रोगियों की हो रही दुर्दशा के मुद्दे को गंभीरता से लिया गया था। इस समस्या को हल करने के लिए दो महीने का समय दिया गया था। इसके तहत कुछ हद तक दवाओं की खरीदी और वितरण शुरू कर दिया गया है।

अस्पताल की डीन डॉ. पल्लवी साफले ने बताया कि अब तक दवाइयां और सर्जिकल से जुड़े सामान को हाफकिन के माध्यम से ही खरीदा जाता था। हालांकि हाफकिन की तरफ से हो रही देरी के चलते अब दवाइयों के साथ जरूरी सामानों को डीन के अधिकारों का उपयोग कर खरीदा जाएगा।

डॉ. साफले ने कहा कि दवाओं, परीक्षण और सर्जरी से जुड़े सामानों की निगरानी के साथ ही बीच-बीच में समीक्षा करते रहने के लिए तीन डॉक्टरों की टीम बनाई गई है। इस टीम में शामिल डॉ. श्यामल सिन्हा को दवाइयों, डॉ. गिरीश बख्äशी को सर्जिकल और डॉ. पूर्वा पाटील को रियेजन लैब की जिम्मेदारी दी गई है।

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