बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्देश...सभी पुलिसकर्मियों को 30 अगस्त तक गिरफ्तारी के नियमों के बारे में रहे जानकारी

Bombay High Court's directive...all policemen should be aware of the rules of arrest till August 30

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बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्देश...सभी पुलिसकर्मियों को 30 अगस्त तक गिरफ्तारी के नियमों के बारे में रहे जानकारी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया था कि राज्य के प्रत्येक पुलिस कर्मियों को 30 अगस्त तक गिरफ्तारी के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं और उसके कारणों को दर्ज करने के बारे में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा जारी हालिया दिशानिर्देशों से अवगत होना चाहिए.

मुंबई : बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया था कि राज्य के प्रत्येक पुलिस कर्मियों को 30 अगस्त तक गिरफ्तारी के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं और उसके कारणों को दर्ज करने के बारे में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा जारी हालिया दिशानिर्देशों से अवगत होना चाहिए.

अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि "उक्त दिशानिर्देशों का पालन करने में विफलता, उक्त अधिकारी के साथ-साथ वरिष्ठों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को आमंत्रित करेगी."

न्यायमूर्ति भारती एच डांगरे की एकल-न्यायाधीश पीठ ने पिछले हफ्ते भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए (घरेलू हिंसा) के तहत ठाणे पुलिस द्वारा दायर एक व्यक्ति द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश पारित किए.

हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित पुलिस आयुक्त (सीपी), पुलिस अधीक्षक (एसपी) और उप-मंडल पुलिस अधिकारियों (एसडीपीओ) को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि थाना प्रभारी और जांच अधिकारियों द्वारा सभी पुलिस स्टेशनों पर दिशानिर्देश प्रसारित किए जाएं. दिशानिर्देश सरकारी वेबसाइटों और पुलिस विभाग की वेबसाइट पर भी प्रकाशित किए जाने चाहिए.

रिकॉर्ड करना होगा गिरफ्तारी का फैसला

राज्य के लिए अतिरिक्त लोक अभियोजक एस वी गावंद ने 'गिरफ्तारी के कानून' पर दिशा-निर्देशों को रिकॉर्ड में रखा, जिसमें अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) और सतेंद्र कुमार एंटील बनाम सीबीआई (2021) मामलों में सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का उल्लेख है.

डीजीपी के आदेश में कहा गया है कि यदि जांच अधिकारी, साक्ष्य सामग्री की पर्याप्तता का आकलन करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार करने का फैसला करता है, तो वह गिरफ्तारी करने या न करने के लिए रिकॉर्ड करेगा.

दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि एक बार जांच अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी का निर्णय लेने के बाद, उसे सीआरपीसी और पिछले अदालत के फैसले के अनुसार व्यक्तियों को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया का पालन करना होगा.

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