मुंबई में फिर बढ़ा कचरा... 6,500 मीट्रिक टन कचरा निकल रहा है रोजाना

Garbage increased again in Mumbai... 6,500 metric tonnes of garbage is being generated daily

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मुंबई में फिर बढ़ा कचरा... 6,500 मीट्रिक टन कचरा निकल रहा है रोजाना

कोरोना संकट और लॉकडाउन के दौरान मुंबई में सफाई का स्तर काफी अच्छा हो गया था। लेकिन प्रतिबंधों के उठने के बाद मुंबई में फिर कचरे का उत्पादन बढ़ गया है। मुंबई में अब प्रतिदिन 6500 मीट्रिक टन कचरा पैदा हो रहा है। कोरोना के दौरान यह 3500 से 4000 मीट्रिक टन था।

मुंबई: कोरोना संकट और लॉकडाउन के दौरान मुंबई में सफाई का स्तर काफी अच्छा हो गया था। लेकिन प्रतिबंधों के उठने के बाद मुंबई में फिर कचरे का उत्पादन बढ़ गया है। मुंबई में अब प्रतिदिन 6500 मीट्रिक टन कचरा पैदा हो रहा है। कोरोना के दौरान यह 3500 से 4000 मीट्रिक टन था।

बीएमसी ने 2 अक्टूबर, 2017 से सोसायटियों में कचरा प्रबंधन अनिवार्य किया है। इसके तहत 20 हजार वर्गमीटर से बड़ी सोसायटियों और 100 किलो से ज्यादा कचरा निर्माण करनेवाली सोसायटियों में गीले कचरे के डिस्पोजल की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।

सोसायटी में कचरे से खाद निर्माण की व्यवस्था करने वाली सोसायटियों को प्रॉपर्टी टैक्स में बीएमसी छूट भी दे रही है। इसके बावजूद मुंबई में कचरे का उत्पादन बढ़ रहा है। मुंबई में 35000 रजिस्टर्ड सोसायटियां हैं, जिनमें से महज 1300 सोसायटियों में कचरे के डिस्पोजल की प्रक्रिया शुरू हुई है।

बीएमसी का घनकचरा विभाग प्रतिदिन औसतन 6 हजार मीट्रिक टन से अधिक कचरा उठा कर डंपिंग ग्राउंड में फेंकता है। इस समस्या के समाधान के लिए बीएमसी ने मुंबई में शत प्रतिशत कचरा प्रॉसेस करने का रोडमैप बनाया है। इसमें कचरे का विकेंद्रीकरण (गीला और सूखा अलग-अलग) दो गुना करने और हर वॉर्ड में कचरा प्रॉसेस करने सहित कचरे से बिजली उत्पादन शामिल है।

बीएमसी घनकचरा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कोरोना के बाद लोगों में कचरे को लेकर काफी जागरूकता आई है। लोग पहले के मुकाबले अब कम कचरा इधर-उधर फेंक रहे हैं। इससे कचरा उठाने में ज्यादा दिक्कत नहीं आ रही है।

मुंबई में कोरोना काल के मुकाबले मेडिकल कचरा काफी कम हो गया है। अब हॉस्पिटल में ही मेडिकल कचरा पैदा हो रहा है। मेडिकल कचरे में ग्लव्स, मास्क, सैनेटाइजर बोतल, स्लाइन, ग्लूकोज की बोतल व अन्य सामान रहता है। कोरोना के ज्यादातर मरीज अब घर में ट्रीटमेंट करा रहे हैं। इसलिए जहां से ऐसी सूचना मिलती है, वहां से बायोमेडिकल कचरा उठाया जाता है।

अब कंटेनमेंट जोन नहीं है, इसलिए पहले बायोमेडिकल कचरा उठाने के लिए जो स्पेशल टीम बनाई गई थी, उसे दूसरे कार्यों में लगा दिया गया है। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए बीएमसी ने मुंबई में शत प्रतिशत कचरा प्रॉसेस करने का रोडमैप बनाया है।

घनकचरा विभाग ने विजन-2030 के तहत शत प्रतिशत कचरा प्रॉसेस और कार्बन फुटप्रिंट (कार्बन उत्सर्जन) में 20 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही बीएमसी ने मुंबई में फुटपाथ कचरे के डिब्बे से मुक्त करने, दिन में दो बार कचरा उठाने की व्यवस्था, सुबह जल्दी और रात में कचरा उठाने की योजना बनाई है।

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