पूर्णबंदी लागू होने के बाद देश में कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या वृद्धि दर में भारी गिरावट

पूर्णबंदी लागू होने के बाद देश में कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या वृद्धि दर में भारी गिरावट

देश में कोविड-19 से संक्रमित लोगों की संख्या तेरह हज़ार आठ सौ पैंतीस हो गयी। संक्रमण से देश में अब तक 452 लोगों की मृत्यु हुई। कुल ग्यारह हज़ार छह सौ सोलह लोगों का इलाज चल रहा है, जबकि एक हज़ार सात सौ छियासठ रोगियों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गयी। एक रोगी देश से बाहर चला गया।

महाराष्ट्र में सबसे अधिक तीन हज़ार दो सौ, जबकि दिल्ली में एक हज़ार छह सौ चालीस लोग संक्रमित हैं। मध्य प्रदेश में संक्रमित लोगों की संख्या एक हज़ार तीन सौ आठ, जबकि तमिलनाडु में एक हज़ार दो सौ सड़सठ है। सबसे अधिक एक सौ चौरानवे लोगों की मृत्यु महाराष्ट्र में हुई। मध्य प्रदेश में संक्रमण से 57 लोगों की जान गयी, जबकि गुजरात और दिल्ली में 38-38 लोगों की मृत्यु हुई।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने आज नई दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि कोविड-19 रोगियों के ठीक होने और संक्रमण से मृत्यु के अनुपात के मामले में भारत कई अन्य देशों से बेहतर कार्य कर रहा है। सरकार इस अनुपात को और सुधारने के प्रयास कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि लॉकडाउन से पहले करीब तीन दिन में भारत में संक्रमित लोगों की संख्या दोगुनी हो गयी थी। पिछले करीब छह दशमलव दो दिन में संक्रमित लोगों की संख्या दोगुनी हुई। देश के 19 राज्यों में संक्रमण की दर कम रही, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।

ऐसे राज्यों और ज़िलों में पांच लाख रैपिड एंटीबॉडी जांच किट वितरित की जा रही हैं, जहां संक्रमण के मामलों की संख्या अधिक है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि लॉकडाउन के और दिशानिर्देश तैयार करने के लिए आज मंत्रियों के समूह की बैठक हुई। जांच, वैक्सीन, औषधि, अस्पताल में उपकरण और सामान्य स्वास्थ्य के क्षेत्रों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थानों के प्रयासों की भी समीक्षा की गयी। उन्होंने कहा कि सी.एस.आई.आर., डी.बी.टी., डी.एस.टी. और डी.ए.ई. जांच क्षमता बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। नई, रैपिड और सटीक जांच किट विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है, जिससे तीस मिनट में जांच के परिणाम मिल सकें। सरकार वायरल सीक्वेंसिंग और वेक्सीन के विकास पर भी काम कर रही है। भारत वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर भी कार्य कर रहा है, ताकि प्रभावशाली वैक्सीन तैयार की जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार इन प्रक्रियाओं में तेज़ी लाने के प्रयास कर रही है।

कोविड-19 की अभी तक कोई दवाई उपलब्ध नहीं है, इसलिए प्रभावशाली दवाई तैयार करने पर भी कार्य करने की ज़रूरत है। अधिकारी ने बताया कि बहुपक्षीय प्रयासों के रूप में रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने में भारत के पारम्परिक ज्ञान पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि सी.एस.आई.आर. प्रयोगशालाएं पी.पी.ई., ऑक्सीजन कन्सल्ट्रेटर, वेंटीलेटर और अन्य सहायक उपकरणों के लिए स्वदेशी डिज़ाइन विकसित कर रही हैं। राज्यों को ऐसे उपकरणों की जानकारी भी दी जा रही है जिनसे इस महामारी से संबंधित मामलों की संख्या के आधार पर कोविड समर्पित अस्पतालों और केयर सेंटर की आवश्यकताओं का अनुमान लगाया जा सके।

देशभर में इस समय एक हज़ार नौ सौ उन्नीस समर्पित कोविड अस्पताल और कोविड स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें एक लाख 73 हज़ार आइसोलेशन बिस्तर और इक्कीस हज़ार आठ सौ आईसीयू बिस्तर हैं।

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि वन क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों और अन्य वनवासियों के सूक्ष्म वन उत्पाद और लकड़ी से भिन्न अन्य उत्पादों के संग्रह, कटाई और प्रसंस्करण को लॉकडाउन के प्रतिबंधों से छूट दी गयी है। डाक विभाग ने अस्पतालों और अन्य संस्थानों में एक सौ टन से अधिक दवाएं और चिकित्सा उपकरण पहुंचाए हैं। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय डाक विभाग ने लॉकडाउन के दौरान विशेष उपायों के ज़रिये डाक पहुंचाई है। डाक विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि लोगों को सरकार से पेंशन और अन्य आवश्यक जनकल्याण के भुगतान मिलते रहें। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के ज़रिये लाभार्थियों के घर पर भुगतान उपलब्ध कराया जा रहा है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अधिकारी ने बताया कि अब तक कोविड-19 के लिए तीन लाख उन्नीस हजार चार सौ नमूनों की जांच की गयी है। देशभर में 28 हज़ार तीन सौ चालीस नमूनों की जांच हुई। इनमें से तेईस हज़ार नौ सौ बत्तीस की जांच परिषद की 183 प्रयोगशालाओं में हुई, जबकि शेष नमूनों की जांच निजी क्षेत्र की अस्सी प्रयोगशालाओं में हुई। परिषद कोविड-19 महामारी से लड़ाई में बी.सी.जी. वैक्सीन के प्रभाव का अध्ययन कर रही है। अध्ययन के परिणाम आने तक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए भी इस वैक्सीन की सिफारिश नहीं की जाएगी। परिषद के प्रतिनिधि ने कहा कि निगरानी के उद्देश्य से पूल टैस्टिंग की सिफारिश की गयी है, जो ऐसी जगह इस्तेमाल की जा सकती है जहां संक्रमण की दर कम हो। परिषद ने व्यक्तिगत जांच के लिए पूल टैस्टिंग की सिफारिश नहीं की है, क्योंकि एक-एक व्यक्ति के लिए इसकी जांच महंगी पड़ती है।

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