प्रवासी मजदूरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया

प्रवासी मजदूरों को लेकर  सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया

प्रवासी मजदूरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. मजदूरों के दर्द को समझते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि प्रवासी मजदूरों से ट्रेन या बस का किराया नहीं वसूला जाए. ट्रेन का किराया राज्य सरकारें देंगी.

इसके कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के खाने-पीने की व्यवस्था राज्य सरकारों और रेलवे को करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को ये सूचना दी जाएगी कि उनका ट्रेन कब है. कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से 5 जून तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

कोर्ट ने निर्देश दिया कि यात्रा के दौरान जिस राज्य से ट्रेन खुलेगी वहां की राज्य सरकार खाना और पानी का इंतजाम करेगी. रेलवे प्रवासी मजदूरों को खाना और पानी देगी. बस से जाने वाले प्रवासी मजदूरों को भी खाना और पानी दिया जाएगा. राज्य सरकारें प्रवासी मजदूरों के रजिस्ट्रेशन का काम देखेंगी और रजिस्ट्रेशन के बाद वे सुनिश्चित करेंगी कि प्रवासी मजदूर जल्द से जल्द ट्रेन या बस में बैठकर रवाना हो सकें.

कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में सभी सूचनाएं प्रकाशित होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि जो प्रवासी मजदूर पैदल जा रहे हैं उन्हें तुरंत शेल्टर होम में ले जाकर उन्हें खाना और सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. कोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया कि राज्य सरकारें जब प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेन उपलब्ध कराने की मांग करें तो उन्हें तुरंत ट्रेन उपलब्ध कराया जाए.

केंद्र-राज्य सरकारों से मांगा जवाब

प्रवासी श्रमिकों की दयनीय दशा पर कोर्ट ने काफी नाराजगी जताई.और केंद्र एवं राज्य सरकारों से जवाब मांगा है. कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से कहा कि वे अपने जवाबी हलफनामे में बताएं कि कितने प्रवासी मजदूर हैं जो अपने गांव जाना चाहते हैं. उनके लिए परिवहन की क्या योजना है. उनके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया क्या है.

कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्रेशन के अलावा प्रवासी मजदूरों के लिए परिवहन, खाना और पानी देने में कई गड़बड़ियां हैं. उन्हें रजिस्ट्रेशन के बाद भी काफी समय तक इंतजार करना पड़ता है. कुछ राज्यों ने अभी तक हमारे नोटिस का जवाब नहीं दिया है. कम समय की वजह से वे अपना रिपोर्ट दाखिल नहीं कर सके हैं. केंद्र सरकार भी जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग कर रही है.

मजदूर को किराया देने की जरूरत नहीं

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि मजदूरों के टिकट का किराया कौन दे रहा है? तब तुषार मेहता ने कहा कि शुरुआत में इसे लेकर भ्रम की स्थिति बनी लेकिन बाद में ये तय हुआ कि किराया या तो वो राज्य देंगे जहां से मजदूर पलायन कर रहे हैं या वो राज्य जहां पर जाना है लेकिन मजदूरों को चुकाने की ज़रूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी 3700 ट्रेनें प्रवासी मजदूरों के लिए चला रखी हैं. करीब 50 लाख प्रवासी मजदूर अपने गांव पहुंच चुके हैं. रोजाना एक लाख 85 हजार प्रवासी मजदूरों को शिफ्ट किया जा रहा है. पड़ोसी राज्यों के सहयोग से 40 लाख को सड़क से शिफ्ट किया गया है. एक मई से लेकर 27 मई तक कुल 91 लाख प्रवासी मजदूर शिफ्ट किए गए हैं. अभी तक एक करोड़ से ज्यादा प्रवासी मजदूर भेजे जा चुके हैं.

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