रूसी वैक्सीन: निराशो को आशा

रूसी वैक्सीन: निराशो को आशा

कोविड-19 के प्रसार के बाद से ही वैश्विक स्तर पर वैक्सीन पर शोध प्रारंभ हो गए थे | विश्व के अग्रणी देशों द्वारा इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे थे | वहीं दूसरी तरफ कोविड-19 का प्रसार बढ़ता जा रहा था | ऐसे में समस्त विश्व की निगाहें कुछ गिने-चुने देशों पर थी, जो वैक्सीन पर शोध कर रहे थे | लगभग पांच से छः महीने बीत जाने के बाद यूनाइटेड किंगडम और रूस से वैक्सीन निर्माण से संबंधित जानकारियां समाचार पत्रों में सामने आई | जिसके बाद वैश्विक स्तर पर एक आशा की किरण दिखी | बहुत सारे देशों ने वैक्सीन बनाने वाली संस्थाओं के साथ समझौते भी कर लिए, हालांकि रूस के समक्ष वैक्सीन के सफलतापूर्वक निर्माण के दावे के बाद भी चुनौतियां विद्यमान थी | क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ज्यादातर देशों का झुकाव यूनाइटेड किंग्डम द्वारा तैयार वैक्सीन की तरफ था |

रूस ने इन्हीं चिंताओं को देखते हुए वैक्सीन के बाजार पहुंच को सुनिश्चित करने के लिए ब्राजील से समझौता किया | रूस ब्राजील के साथ मिलकर स्पूतनिक V नामक कोविड-19 वैक्सीन को बाजार में लाने के लिए प्रयासरत है | वहीं दूसरी तरफ जो देश यूनाइटेड किंगडम से वैक्सीन की उम्मीद लगाए बैठे थे, उनको निराशा हाथ लगी | एस्ट्रेजनेका नामक कंपनी ने चैडॉक्स-1 नाम से कोविड-19 की वैक्सीन बनाई थी जिसका तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा था | यह परीक्षण यूनाइटेड किंगडम दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में हो रहा था | इसके अतिरिक्त इस कंपनी द्वारा अमेरिका में 30 हजार लोगों पर यह परीक्षण किया गया | इस कंपनी के अनुसार अभी तक 50 हजार लोगों पर इस वैक्सीन के परीक्षण किए जा चुके हैं | लेकिन हाल ही में यूनाइटेड किंगडम में कुछ व्यक्तियों पर इस वैक्सीन के साइड इफेक्ट सामने आए हैं | जिनमें बुखार, सर दर्द, मांसपेशियों में दर्द के साथ इंजेक्शन देने के स्थान पर कुछ समस्याएं दिखी हैं | जिसके बाद से कंपनी ने तृतीय चरण के परीक्षण को रोक दिया है | परीक्षण रुकने के साथ ही दिसंबर माह में वैक्सीन की आस लगाए देशों को निराशा हाथ लगी है | अब यह वैक्सीन मार्च माह के बाद आने की उम्मीद है |

किसी भी वैक्सीन के नैदानिक परीक्षण या क्लिनिकल ट्रायल के तीन चरण होते हैं | जिसके बाद चौथे चरण में यह वैक्सीन आम जनता के उपयोग के लिए लाई जाती है | जिसमें तीसरा चरण महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस चरण में हजारों की संख्या में परीक्षण होते हैं | इस चरण में 25 प्रतिशत से कम वैक्सीन ही पहुंच पाती हैं | भारत में सिरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया द्वारा एस्ट्रेजनेका कंपनी से वैक्सीन के उपलब्धता के लिए समझौता किया गया था | सिरम इंस्टीट्यूट द्वारा भी तीसरे चरण का प्रसिद्ध परीक्षण किया जा रहा था, जिस पर भारत के ड्रग कंट्रोलर ने रोक लगा दिया है | वहीं दूसरी तरफ रूस द्वारा तैयार वैक्सीन स्पूतनिक V का प्रयोग रूस के साथ-साथ कई अन्य देशों द्वारा भी किया जा रहा है | जिसके अभी तक कोई भी नकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिले हैं |

मौजूदा समय में जब ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और एस्ट्रेजनेका द्वारा तैयार वैक्सीन तीसरे चरण के परीक्षण में असफल होती दिख रही है, ऐसे में समस्त विश्व की निगाहें अब रूस की तरफ हैं | निश्चित तौर पर बुरी तरह से कोविड-19 से प्रभावित देशों को रूसी वैक्सीन के इस्तेमाल की अनुमति दी जानी चाहिए | संकटकालीन परिस्थितियों में जहां मानव अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है ऐसे में प्रतिबंधों को दरकिनार करना चाहिए | भारत सरकार को भी चाहिए कि जल्द से जल्द रूसी वैक्सीन को लेकर समझौते किए जाएं | जिससे हमारे प्रथम पंक्ति के योद्धाओं को सुरक्षित किया जा सके | रूस हमारा सदाबहार मित्र रहा है, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से लेकर रक्षा विनिर्माण तक रूस हमारा साझेदार है | ऐसे में यदि उचित वैक्सीन के खरीद के माध्यम से हम रूसी अर्थव्यवस्था में कुछ योगदान कर सकते हैं, तो हमें निसंकोच करना चाहिए | भारत सरकार यदि प्रयास करें तो रूस भारत को वैक्सीन निर्माण में भी साझीदार बना सकता है |

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