एंटीलिया जिलेटिन केस-मुंबई 2006 धमाका और औरंगाबाद आर्म्स केस की उपलब्धि, पर सिपाही को साहब बोलते हैं कमिश्नर जय जीत सिंह

एंटीलिया जिलेटिन केस-मुंबई 2006 धमाका और औरंगाबाद आर्म्स केस की उपलब्धि, पर सिपाही को साहब बोलते हैं कमिश्नर जय जीत सिंह

Rokthok Lekhani

मुंबई : एंटीलिया जिलेटिन केस और हिरेन मनसुख मर्डर में सचिन वझे और उसकी पूरी टोली की पोल सबसे पहले किसने खोली? क्या एनआईए ने? नहीं। एटीएस ने, जिसके चीफ उन दिनों जयजीत सिंह थे, जो अब ठाणे के पुलिस कमिश्नर हैं। वही जयजीत सिंह इन दिनों उन परमबीर सिंह के खिलाफ ठाणे में दर्ज दो एफआईआर की जांच करवा रहे हैं, जो परमबीर सिंह खुद एंटीलिया जिलेटिन केस में भी जांच के घेरे में हैं।
जयजीत सिंह के साथ लंबे समय तक काम कर चुके एक अधिकारी ने हमें बताया कि जयजीत सिंह टेक्नो सेवी अधिकारी हैं। यदि एटीएस में वह उस दौर में नहीं होते, तो सचिन वझे और उसकी पूरी टोली का कारनामा इतनी आसानी से सामने नहीं आता।

जयजीत सिंह की महाराष्ट्र एटीएस में यह दूसरी पारी थी। साल 2004 में जब महाराष्ट्र एटीएस की स्थापना हुई थी, तो जयजीत सिंह उसके पहले डीसीपी थे। एक अधिकारी के अनुसार, जयजीत सिंह के टेक्नो सेवी के जुनून की वजह से ही महाराष्ट्र एटीएस की कॉल इंटरसेप्ट सेल में दुनिया के सबसे बेहतरीन उपकरण लाए गए।

आज महाराष्ट्र एटीएस की इंटरसेप्ट सेल को आईबी और रॉ के बाद सबसे बेहतरीन माना जाता है। 26/11 के मुंबई हमले के दौरान आतंकवादियों की कॉल्स महाराष्ट्र एटीएस ने ही इंटरसेप्ट की थीं। आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग केस भले ही मुंबई क्राइम ब्रांच ने इनवेस्टिगेट किया था, पर उस केस में भी कॉल्स को इंटरसेप्ट करने का जिम्मा एटीएस को ही दिया गया था।

साल, 2006 के चर्चित औरंगाबाद आर्म्स केस की जांच से भी जयजीत सिंह जुड़े थे। उस केस में जैबुद्दीन अंसारी नामक एक आरोपी वॉन्टेड था, जो बाद में बांग्लादेश के रास्ते पाकिस्तान भाग गया था। पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगनाओं ने उसका नाम वहां अबू जुंदाल कर दिया था। इसी जुंदाल ने अजमल कसाब सहित मुंबई आए दस आतंकवादियों को हिंदी सिखाई थी।

साल 2006 में मुंबई की एक दर्जन से ज्यादा लोकल ट्रेनों में बम धमाके हुए थे। उस केस की जांच से भी जयजीत सिंह जुड़े थे। उसके बाद वह कुछ सालों तक दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर चले गए। वहां से आने के बाद उन्होंने नाशिक में आईजी के तौर पर और रेलवे पुलिस में अडिशनल डीजी के तौर पर काम किया।
जयजीत सिंह के साथ काम कर चुके रिटायर एसीपी सुनील देशमुख कहते हैं कि वह अपने किसी भी जूनियर को उसके सीधे नाम से कभी संबोधित नहीं करते। उसे ‘जी’ या ‘साहब’ कहकर बुलाते हैं। यहां तक कि अपने सिपाही को भी जब बुलाते हैं, तो उसके नाम के साथ साहब जरूर जोड़ते हैं। किसी केस की जांच से जुड़े अपनी उम्र से बड़े इंस्पेक्टर से कहते हैं कि आप मेरे बड़े भाई जैसे हो। आप ही मुझे गाइड करो कि इस केस में कैसे आरोपी तक पहुंचना है। उनकी अपनत्व की इस आदत से सामने वाला उनका फैन हो जाता है।

एंटीलिया जिलेटिन कांड में करीब आधा दर्जन पुलिस वाले भी गिरफ्तार हुए हैं, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि इस केस का मास्टरमाइंड राजनीतिक कारणों से अब भी पकड़ा नहीं गया है। यह केस अधिकृत रूप से एनआईए के पास है, लेकिन काफी लोगों का मानना है कि उस मास्टरमाइंड का नाम जयजीत सिंह को भी पता है। यदि केस एटीएस के पास होता, तो संभव है वह मास्टरमाइंड एटीएस की कस्टडी में होता।


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