संजय राउत ने कहा, ‘रज़ा अकादमी की औक़ात नहीं’, महाराष्ट्र में दंगों का ज़िम्मेदार कौन?

संजय राउत ने कहा, ‘रज़ा अकादमी की औक़ात नहीं’, महाराष्ट्र में दंगों का ज़िम्मेदार कौन?

Rokthok Lekhani

बांग्लादेश में कुछ हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया. इसके विरोध में त्रिपुरा में हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया. सोशल मीडिया में अफवाह फैली कि वहां मस्जिदों को नुकसान पहुंचाया गया है. इस चिंगारी से महाराष्ट्र में आग भड़क गई और यहां अमरावती, नांदेड़ और मालेगांव में हिंसा भड़क उठी.

बीजेपी नेताओं का आरोप है कि महाराष्ट्र में दंगे रज़ा अकादमी ने भड़काए हैं. जानबूझ कर रज़ा अकादमी की ओर से पेंपलेट्स बांटे गए और यह प्रचारित किया गया कि कौम का सफाया किया जा रहा है. इसके बाद हिंसा की साजिश रची गई. यह आरोप बीजेपी विधायक नितेश राणे ने लगाया है. उन्होंने कहा है कि रज़ा अकादमी महाविकास आघाडी की पिल्लू है.

इसके जवाब में संजय राउत ने पत्रकारों से बातचीत में यह सवाल उठाया कि त्रिपुरा की घटना का असर महाराष्ट्र में ही क्यों हो रहा है? यूपी में क्यों नहीं हुआ? मध्य प्रदेश में क्यों नहीं हुआ? हरियाणा, कर्नाटक और बिहार में क्यों नहीं हुआ? हिंदुओं पर अत्याचारों का विरोध सिर्फ महाराष्ट्र और त्रिपुरा में ही क्यों दिखाई दे रहा है?

संजय राउत ने कहा कि, ‘पूरे देश में हिंदू हैं, सब जगह रिएक्शन उठने चाहिए. लेकिन रिएक्शन सिर्फ अमरावती में होते हैं, मराठवाड़ा में होते हैं. रज़ा अकादमी का एक कुख्यात इतिहास है. लेकिन उसकी इतनी औक़ात नहीं है कि वे महाराष्ट्र में इस तरह से अलग-अलग शहरों में दंगे भड़काए.

दरअसल महाराष्ट्र को जानबूझ कर चुना गया. इतनी दूर त्रिपुरा से यहां दंगे इसलिए भड़काए गए क्योंकि यहां की राज्य सरकार को अस्थिर किया जा सके. अगर हिंदुओं पर कहीं अत्याचार हो रहा है तो मोर्चा दूसरे राज्यों में भी निकलना चाहिए सिर्फ महाराष्ट्र और त्रिपुरा में ही क्यों? ऐसा इसलिए क्योंकि महाराष्ट्र को अस्थिर करने और देश में तनाव पैदा करने की साजिश रची जा रही है. पिछले दिनों हुए 13 राज्यों में चुनावों के नतीजे बीजेपी के पक्ष में नहीं गए हैं. इसलिए माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है.’ ‘हिंदुओं पर हुए अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन त्रिपुरा में क्यों? दिल्ली में क्यों नहीं?’

संजय राउत ने कहा कि, ‘बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन त्रिपुरा में क्यों हुए? दिल्ली में क्यों नहीं हुए? बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पहले तो दिल्ली में होने चाहिए थे. बांग्लादेश छोड़िए कश्मीर में हिंदू पंडितों पर अत्याचार हो रहा है. कल ही मणिपुर में एक कर्नल के परिवार को टेररिस्ट अटैक में शहीद कर दिया गया. चलिए इसके खिलाफ दिल्ली में मिलकर विरोध प्रदर्शन करते हैं.’

आगे संजय राउत ने कहा, ‘अगर इस देश में हिंदू सचमुच खतरे में है, तो मैं कहूंगा कि आरएसएस के सरसंघचालक मोहन राव भागवत साहब दिल्ली में इसके खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करें. हम भी साथ आ जाएंगे. लेकिन ऐसा नहीं होगा, त्रिपुरा में विरोध प्रदर्शन इसलिए हुए क्योंकि वहां ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी बीजेपी के सामने चुनौती पैदा कर रही हैं.साजिश त्रिपुरा में रची जा रही है, वातावरण पूरे देश का बिगड़ रहा है.’


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