केंद्र सरकार की गलत नीतियों की वजह से देश में पांच माह के उच्च स्तर पर पहुंची महंगाई

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Rokthok Lekhani

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार की गलत नीतियों की वजह से देश में महंगाई चरम पर है। लगातार बढ़ रही महंगाई की वजह से आम जनता में त्राहि मची हुई है। खाद्य पदार्थों से लेकर र्इंधन तक, सभी वस्तुओं की कीमत सातवें आसमान पर है। हालांकि केंद्र सरकार ने जनता को लुभाने के लिए हाल ही में डीजल, पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को कम किया।

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इसके बाद तेलों की कीमत में मामूली सुधार हुआ लेकिन आम जनता के जीवन पर इसका कोई असर दिखता नजर नहीं आ रहा है। अब आम जनता पर फिर से महंगाई की `थोक’ मार पड़ने वाली है। दरअसल खुदरा महंगाई में इजाफे के साथ-साथ थोक महंगाई भी देश में करीब दो फीसदी बढ़ गई है।

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बता दें कि कल जारी किए गए अक्टूबर के थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों में यह बात सामने आई है। सरकार की ओर से जारी किए गए डेटा के मुताबिक देश में थोक महंगाई सितंबर की तुलना में बढ़कर १२.५४ प्रतिशत पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि सितंबर में थोक मुद्रास्फीति १०.६६ प्रतिशत थी।

होलसेल प्राइस इंडेक्स या थोक मूल्य सूचकांक दरअसल उन कीमतों से तय होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में थोक महंगाई बीते पांच महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। र्इंधन और बिजली की कीमतों में बेतहाशा तेजी के कारण थोक महंगाई में इजाफा हुआ है। इसके अलावा खाने-पीने के सामानों की थोक महंगाई दर भी बढ़कर १.१४ फीसदी से बढ़कर ३.०६ फीसदी हो गई है।

पिछले कुछ महीनों में समग्र मुद्रास्फीति में नरमी का प्राथमिक कारण यह है कि र्इंधन की कीमतों में वृद्धि धीमी थी। लेकिन अक्टूबर में र्इंधन मुद्रास्फीति फिर से बढ़कर ३७.२ प्रतिशत हो गई, जो सितंबर में २४.८ प्रतिशत पर थी। इसके अलावा यह आंकड़ा अगस्त में २६ प्रतिशत और जुलाई के २७ प्रतिशत रहा था। आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान खाने-पीने के सामानों की थोक महंगाई दर खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति में भी माह-दर-माह आधार पर (-) १.६९ प्रतिशत की वृद्धि हुई।


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