कोरोना में बंद हो गई मुंबई पुलिस की 8 घंटे की ड्यूटी…!

कोरोना में बंद हो गई मुंबई पुलिस की 8 घंटे की ड्यूटी…!

Rokthok Lekhani

मुंबई : करीब पांच साल पहले मुंबई पुलिस में सिपाहियों की 8 घंटे की ड्यूटी शुरू हुई थी, जो अब बंद हो गई है। पुलिस सिपाही अब फिर से 12 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। कोरोना अब कंट्रोल में है, इधर कोई बड़े त्योहार भी नहीं हैं, जिसके लिए बंदोबस्त की जरूरत पड़े। फिर भी पुलिस के आला अधिकारी 8 घंटे के पुराने नियम को फिर से लागू करने के मूड में नहीं हैं।

पुलिस सिपाही रवींद्र पाटील ने करीब 8 साल पहले 8 घंटे की ड्यूटी का प्रॉजेक्ट बनाया था। तब वह डीजी ऑफिस में कार्यरत थे। उन्होंने अपना प्रॉजेक्ट उस वक्त के डीजीपी प्रवीण दीक्षित को दिखाया। लेकिन इस प्रॉजेक्ट को हरी झंडी तब मिली, जब दत्ता पडसलगीकर मुंबई के सीपी बनकर आए। पडसलगीकर ने इसे साल, 2016 में सबसे पहले देवनार पुलिस स्टेशन में प्रयोग के तौर पर लागू किया।

रवींद्र पाटील का उस वक्त तक इस पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर हो चुका था। देवनार में जब यह प्रयोग सफल हो गया, तब मुंबई के 91 पुलिस स्टेशन में लागू किया गया। सिर्फ दो सागरी पुलिस स्टेशनों में इस पर अमल नहीं हो पाया। करीब सवा चार साल तक मुंबई में यह प्रयोग इतना सफल रहा, कि मुंबई के बाहर के भी कई शहरों में भी इस प्रॉजेक्ट का अध्ययन किया जाने लगा।

तभी मार्च, 2020 में कोरोना के केस बढ़ने लगे और लॉकडाउन सख्ती से लागू करने के लिए पुलिसकर्मियों को सड़कों पर उतारा गया। विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि सिपाही रवींद्र पाटील ने अब एक नया प्रॉजेक्ट बनाया है। उस प्रॉजेक्ट में बताया गया है कि त्योहारों के बंदोबस्त में भी 8 घंटे की ड्यूटी को आराम से लागू किया जा सकता है और पुलिस सिपाहियों को दो दिन का सप्ताह में अवकाश भी मिल सकता है।

प्रॉजेक्ट में ड्यूटी को चार पार्ट में बांटा गया है। पहले पार्ट में पहली शिफ्ट सुबह से, दूसरे पार्ट में दूसरी शिफ्ट दोपहर से, जबकि तीसरे पार्ट में तीसरी शिफ्ट रात से शुरू होगी। प्रॉजेक्ट के चौथे पार्ट में नाइट ड्यूटी के बाद लगातार दो दिन के साप्ताहिक अवकाश की बात की गई है, लेकिन साथ में यह भी कहा गया है कि दो दिन के साप्ताहिक अवकाश लेने वालों को बंदोबस्त के लिए, अवकाश के अगले दिन ड्यूटी पर लगाया जाए। इससे वह फ्रेश रहेगा और बिना तनाव के ड्यूटी पर रहेगा।

महाराष्ट्र पुलिस की संख्या करीब सवा दो लाख है। इसमें सिर्फ 35 हजार ही अधिकारी हैं, बाकी सभी सिपाही हैं। मुंबई पुलिस में भी सिर्फ 4 हजार ही अधिकारी हैं, बाकी 40 हजार सिपाही हैं। मतलब, जिन सिपाहियों को पूरे राज्य में कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी दी गई है, उनके पास अपने परिवार के लिए वक्त नहीं है, क्योंकि उनका आधे से ज्यादा वक्त ड्यूटी में ही निकल जाता है।


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