किसानों ने की प्याज को एमएसपी के दायरे में लाने की मांग…!

किसानों ने की प्याज को एमएसपी के दायरे में लाने की मांग…!

Rokthok Lekhani

महाराष्ट्र : न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की मांग के बीच महाराष्ट्र के किसानों ने प्याज को भी इस व्यवस्था के दायरे में लाने की मांग की है. प्याज के किसानों का कहना है कि खुले बाजार की वजह से उनकी फसल का इतना कम दाम मिल रहा है कि लागत निकालनी भी मुश्किल हो गई है.

इसलिए दूसरी 23 फसलों की तरह इसे भी एमएसपी के दायरे में लेकर दाम फिक्स किया जाए. महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में इन दिनों प्याज का दाम सिर्फ 400 रुपये प्रति क्विंटल तक रह गया है. जिससे किसान हताश हैं.

महाराष्ट्र उन राज्यों में शामिल है जहां पर सबसे ज्यादा कृषक आत्महत्या होती है. इसकी बड़ी वजह फसलों का उचित दाम न मिलना और सूखा है. प्याज, कपास और सोयाबीन यहां की मुख्य फसल है.

ऐसे में एमएसपी पर छिड़ी राष्ट्रव्यापी बहस के बीच महाराष्ट्र कांदा उत्पादक संगठन ने सरकार से कहा है कि प्याज का दाम भी वैज्ञानिक तरीके से फिक्स किया जाए. क्योंकि प्याज के किसान व्यापारियों के चंगुल में बुरी तरह से फंसे हुए हैं. उनकी मेहनत की कमाई कुछ व्यापारी और बिचौलिए खा रहे हैं.

महाराष्ट्र कांदा उत्पादक संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने टीवी-9 डिजिटल से बातचीत में कहा कि सरकार अपनी किसी भी एजेंसी से प्याज की लागत निकलवा ले. देख ले कि इनपुट कॉस्ट कितनी है. फिर अन्य फसलों की तरह उस पर कम से कम 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर इसका न्यूनतम दाम फिक्स कर दे.

उससे नीचे खरीद न हो. ताकि किसानों को फायदा हो. आजादी के 75 साल बाद भी आज तक प्याज को लेकर कोई पॉलिसी नहीं बनी है. जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है. दिघोले ने बताया कि नेशनल हर्टिकल्चर बोर्ड ने 2017 में बताया था कि प्रति किलो प्याज पैदा करने पर 9.34 रुपये की लागत आती है.

तब से अब तक महंगाई बेहताशा बढ़ रही है. डीजल, खाद, कीटनाशक और श्रमिकों पर खर्च में वृद्धि हो चुकी है. हमारे हिसाब से इस समय 18 रुपये प्रति किलो तक की लागत आ रही है. ऐसे में 30-32 रुपये से कम पर खरीद न हो तब जाकर किसानों को फायदा होगा. लेकिन, हालात ये हैं कि कई बार किसानों को 2-3 रुपये किलो तक पर भी प्याज बेचना पड़ता है.

संगठन का आरोप है कि नैफेड किसानों से अव्वल दर्जे की प्याज खरीदता है, लेकिन वो अच्छा दाम नहीं देता. किसानों से 2020 में उसने ज्यादातर परचेजिंग 8 से 11 रुपये पर ही किया. जब सरकारी एजेंसी भी किसानों को उचित दाम नहीं देगी तो व्यापारी कहां से देंगे? दिघोले का कहना है कि किसान के घर से 10 किलो के रेट पर जाने वाली प्याज मार्केट में 50 रुपये हो जाती है.

जिससे उपभोक्ता भी परेशान होते हैं. ऐसे में सरकार बिचौलियों की मनमानी पर रोक लगाए. प्याज की महंगाई किसानों की वजह से नहीं बिचौलियों और व्यापारियों की वजह से बढ़ती है.

केंद्र सरकार के मुताबिक देश में सालाना प्याज उत्पादन औसतन 2.50 करोड़ मीट्रिक टन होता है. हर साल कम से कम 1.5 करोड़ मीट्रिक टन प्याज बेची जाती है. जबकि 15 से 25 लाख मीट्रिक टन प्याज स्टोरेज के दौरान खराब हो जाती है. इसी तरह करीब 35 लाख मीट्रिक टन प्याज एक्सपोर्ट की जाती है.

महाराष्ट्र में देश का 40 फीसदी प्याज पैदा होता है. इसके अलावा मध्य प्रदेश, तेलंगाना, यूपी, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और बिहार इसके दूसरे बड़े उत्पादक हैं. महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित लासलगांव में एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी है.


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