निलंबित पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह लेते थे वसूली का ७५% रकम, बाकी पैसा बर्खास्त सचिन वझे का

निलंबित पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह लेते थे वसूली का ७५% रकम, बाकी पैसा बर्खास्त सचिन वझे का

Rokthok Lekhani

मुंबई : अंडरवर्ल्ड के लोग स्मगलिंग और पुलिस से बचने के लिए गैरकानूनी काम को एक कोड के जरिए बुलाते हैं मगर पुलिस सेवा से बर्खास्त सचिन वझे ने वसूली के लिए मुंबई के पूर्व कमिश्नर के नाम पर एक सीक्रेट कोड तैयार किया था। इस कोड के माध्यम से शहर के प्रतिष्ठानों से वसूली की जाती थी। यह करप्शन कोड के माध्यम से किया जाता था।

इसका खुलासा पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट से हुआ है। क्राइम ब्रांच ने दायर आरोप पत्र में दावा किया है कि वझे, परमबीर सिंह के लिए रंगदारी मांगा करता था। पुलिस की चार्जशीट में पूर्व कमिश्नर को वझे ‘नंबर एक’ बताते हुए उनकी तरफ से वसूली किया करता था। दायर याचिका के मुताबिक वसूली का ७५ प्रतिशत हिस्सा परमबीर सिंह के पास जाता था और बाकी पैसा वझे रखता था।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने गोरेगांव में दर्ज रंगदारी मामले में निलंबित पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह और तीन अन्य के खिलाफ शनिवार को आरोपपत्र दाखिल किया। १,८९५ से अधिक पृष्ठों का आरोपपत्र मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एस.बी. भाजीपाले के समक्ष दाखिल किया गया।

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह के खिलाफ दाखिल यह पहला आरोपपत्र है। वह महाराष्ट्र में जबरन वसूली के कम से कम पांच मामलों में नामजद हैं और उन्हें इस सप्ताह की शुरुआत में निलंबित कर दिया गया था। आरोपियों में से सुमित सिंह और अल्पेश पटेल जमानत पर हैं जबकि विनायक सिंह और रियाज भाटीr वांछित आरोपी हैं।

आरोपपत्र के अनुसार तीन से चार गवाहों के मुताबिक वझे, सिंह को ‘नंबर एक’ बुलाता था और कहता था कि ‘नंबर एक ने पैसा मांगा है।’ आरोपपत्र में कहा गया है कि वझे को कई हाई प्रोफाइल मामलों की जांच करने के आदेश परमबीर सिंह ने दिए थे।

इसके अलावा वह सीधे सिंह से मुलाकात करता था और महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा करता था। चार्जशीट में कहा गया है कि पूर्व कमिश्नर, वझे और अन्य आरोपियों के जरिए क्रिकेट सटोरिए के साथ ही होटल और बार मालिकों से पैसे मांगते थे और पैसे न देने पर उन्हें गिरफ्तार करने तथा उनके प्रतिष्ठानों पर छापे मारने की धमकियां देते थे।

गोरेगांव के बिजनेसमैन बिमल अग्रवाल की शिकायत के अनुसार आरोपी ने दो बार और रेस्टोरेंट पर छापेमारी नहीं करने के लिए उससे नौ लाख रुपए की उगाही की तथा अपने लिए लगभग २.९२ लाख रुपए के दो स्मार्टफोन खरीदने के लिए मजबूर किया।

शिकायतकर्ता के अनुसार वह पार्टनरशिप में इन प्रतिष्ठानों को चलाता था। पुलिस के मुताबिक यह घटना जनवरी २०२० और मार्च २०२१ के बीच हुई। इसके बाद छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। गत गुरुवार को परमबीर सिंह को पुलिस सेवा से निलंबित कर दिया गया है।


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