कोरोना वायरस ने थामी मुम्बई महानगर की रफ्तार

एम.आई.आलम

12 मार्च 1993, मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके ,
12 जगहों पर हुए धमाकों में 257 लोग मारे गए थे जबकि 713 लोग घायल हुए थे। पर मुम्बई नही थमी थी।

26 जुलाई 2005 महानगर मुम्बई के इतिहास का काला दिन जब मुम्बई महानगर बारिश से डूब गई थी हर तरफ हाहाकार था फिर भी मुम्बई नही थमी थी।

11 जूलाई 2006 मुम्बई लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार बम विस्फोट, कुल 7 विस्फोटों मे 135 से अधिक लोग मारे गए। विस्फोट माटुंगा, माहिम, खार, सांताक्रुज़, जोगेश्वरी, बोरीवली, मीरा रोड और भाइंदर क्षेत्रों में लोकल ट्रेनों में हुए। पूरा देश दहल गया और सहम गयी थी मायानगरी, पर मुम्बई नही थमी।

26 नवंबर 2008 को महानगर में 10 पाक आतंकियों ने नँगा नाच किया था । इस हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया था। आतंकवादियों ने मुंबई की चार जगहों ताज महल होटल, ट्राइडेंट ओबेराय, नरीमन हाउस और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को अपना निशाना बनाते हुए खूनी खेल खेला था। इन हमलों में 166 लोगों की जान चली गई। इतने बड़े हादसे के बाद भी मुम्बई नही थमी।
जब जब मुम्बई महानगर पर कोई आफत आयी पूरी दुनिया ने इस शहर के जज़्बे को सलाम किया। कुछ घण्टों आम मुम्बईकर दहशत में ज़रूर रहे पर जल्द ही सब कुछ फिर पटरी पर आ गया। लेकिन, कोरोना वायरस की दहशत ने इस महानगर की धड़कने लगभग रोक दी है। बाजारों में दिखने वाले सन्नाटे इस महानगर ने शायद ही इससे पहले कभी देखे हों। सही मायनों में कहा जा सकता है कि शायद पहली बार थम गई है मुम्बई।
प्रधानमंत्री द्वारा जनता कर्फ्यू कल यानी रविवार को है लेकिन उससे पहले शनिवार को जिस तरह से महानगर में सन्नाटा पसरा है उसे देखकर यह आभास किया जा सकता है कि आने वाले दिन कैसे होने वाले हैं।

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