जज लोया मामले की दोबारा जांच करवा सकती है महाराष्ट्र सरकार, गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा

महाराष्ट्र सरकार सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया के मर्डर केस की जांच फिर से करवा सकती है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि यदि राज्य सरकार को पर्याप्त सबूतों के साथ कोई शिकायत मिलती है तो वह सीबीआई के विशेष न्यायाधीश बीएच लोया की 2014 में कथित तौर पर संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच पर विचार करेगी। अनिल देशमुख ने कहा कि मैं इस मामले में संबंधित व्यक्तियों से मिलूंगा और उनकी बात सुनने के बाद यह तय करूँगा कि इस मामले में आगे और निष्पक्ष जांच की जरूरत है या नहीं।

गौरतलब है कि एनसीपी के प्रवक्ता एवं राज्य के मंत्री नवाब मलिक ने भी पार्टी की एक बैठक के बाद जज लोया मामले पर अपनी बात रखी। शिवसेना नेतृत्व वाली सरकार में एनसीपी के मंत्रियों की चार घंटे चली बैठक के बाद मलिक ने पत्रकारों से कहा कि यदि पर्याप्त सबूतों के साथ कोई शिकायत मिलती है तो सरकार न्यायाधीश बीएच लोया मामले को फिर से खोलने पर विचार करेगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक की अध्यक्षता एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने की। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत में कोई सबूत मिले, तो ही जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में बिना वजह कोई जांच नहीं की जाएगी। महाराष्ट्र में पिछले महीने शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की सरकार बनने के बाद पवार से पूछा गया था कि क्या लोया की कथित संदिग्ध मौत की कोई जांच होगी? पवार ने यह स्पष्ट कर दिया था कि जज लोया के मामले की जांच संभव है।

क्या है मामला?
बता दें कि गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे जज लोया की एक दिसंबर 2014 को नागपुर में मौत हो गई थी। उनकी मौत की वजह दिल का दौरा पड़ना बताया गया था। जब वह अपने साथी की बेटी की शादी में शिरकत करने गए थे। वे नागपुर अपनी सहयोगी जज स्वप्ना जोशी की बेटी की शादी में शिरकत करने गए हुए थे।

मृत बृजगोपाल लोया के परिजनों से हुई बातचीत के आधार पर नवंबर 2017 में द कारवां मैगजीन में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट में लोया की मौत की संदेहास्पद परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आया था। उनकी बहन अनुराधा बियानी ने यह भी आरोप लगाया था कि लोया को बॉम्बे हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस मोहित शाह द्वारा मामले में मनमाफिक फैसला देने के एवज में बतौर रिश्वत 100 करोड़ रुपये देने की पेशकश भी की गयी थी।

इस पत्रिका की रिपोर्ट के बाद पूर्व न्यायाधीशों द्वारा इस मामले की जांच की मांग की गयी थी। इस बारे में कई याचिकाओं के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2018 में जज लोया की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के कारणों की स्वतंत्र जांच के लिए दायर याचिकाएं खारिज कर दी थीं। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि न्यायाधीश की स्वाभाविक मृत्यु हुई थी और इन याचिकाओं में न्याय प्रक्रिया को बाधित करने तथा बदनाम करने के गंभीर प्रयास किए गए हैं। इसके बाद मई 2018 में बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था।

ज्ञात हो कि 26 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन अनवर हुसैन शेख़ की फ़र्ज़ी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई थी। इस मुठभेड़ में सोहराबुद्दीन की पत्नी को भी मार दिया गया था। इन हत्याओं के आरोप गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह पर लगे थे। इस मामले में उनकी गिरफ़्तारी भी हुई थी और न्यायालय के आदेश पर अमित शाह को गुजरात से तड़ीपार कर दिया गया था। हालाँकि, अमित शाह को दिसंबर 2014 में आरोपमुक्त कर दिया गया था।

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