सुपर मार्केट और किराने की दुकानों में वाइन बिक्री के खिलाफ अनशन नहीं करेंगे अन्ना हजारे

मुंबई : सुपर मार्केट और किराने की दुकानों में वाइन बिक्री (Wine selling in supermarket) की इजाजत देने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ समाजसेवक अन्ना हजारे (Anna Hazare) ने 14 फरवरी से अनिश्चितकाल के लिए अनशन और आंदोलन करने की चेतावनी दी थी. इसके बाद सरकार ने उनसे अनशन ना करने की विनती की.

इस पृष्ठभूमि में आज (13 फरवरी, रविवार) अन्ना हजारे के गांव रालेगणसिद्धि की ग्राम सभा (Gram Sabha Ralegansiddhi) में एक अहम बैठक बुलाई गई. ग्राम सभा की बैठक में यह फैसला किया गया कि अन्ना की उम्र 84 साल हो चुकी है. इस उम्र में अन्ना को अनशन करने देना उचित नहीं है. ग्राम सभा ने अन्ना से अपने फैसले को रोकने की अपील की. अन्ना ने ग्राम सभा के फैसले को मान लिया और अनशन के फैसले को स्थगित कर दिया.

लेकिन अन्ना राज्य सरकार द्वारा दी गई सफाई से संतुष्ट नहीं हुए हैं ना ही राज्य सरकार द्वारा उन्हें मनाए जाने की कोशिशों का उन पर कोई फर्क पड़ा है. रालेगणसिद्धि की ग्राम सभा में बोलते हुए वे राज्य सरकार से क्षुब्ध दिखाई दिए. उन्होंने कहा, ‘आपके राज्य में अब बाकी की जिंदगी जीने की इच्छा नहीं.’90 दिनों में जनता से राय लेकर ही सरकार आखिरी फैसला करे इस बीच उन्होंने अपने संबोधन में सरकार को सलाह दी है कि वे आने वाले 90 दिनों में जनता से राय ले, तब जाकर इस पर कोई आखिरी फैसला करे. यह प्रस्ताव ग्राम सभा में पास किया गया और ग्राम सभा की ओर से अरुण भालेकर समेत सभी सदस्यों की अपील को मानते हुए अन्ना ने फिलहाल अनशन स्थगित कर दिया है.

‘तुमच्या राज्यात मला जगायची इच्छा नाही’ अन्ना ने अपने संबोधन में कहा, ‘ आपके राज्य में अब मुझे जीने की इच्छा नहीं है. यह संदेश मैंने सरकार को पहुंचा दिया है. इसके बाद सरकारी स्तर पर मुझे समझाने और मनाने की कोशिशें शुरू हो गईं. लेकिन इससे कोई फायदा नहीं. जो भी फैसला लेना है जनता का मत जानकर लिया जाए. नशे की लत से कई लोगों की जिंदगी बर्बाद तबाह हुई है. मैंने अपनी उम्र देश और समाज के लिए दी है. ऐसे गलत फैसले को मैं चुनौती देता रहूंगा. अपनी मर्जी से कोई भी फैसले लेकर उसे जनता पर लादने की कोशिश ना करें. अगर ऐसा ही हुआ तो ग्राम सभा आंदोलन करेगी. सिर्फ रालेगणसिद्धि ही नहीं, राज्य का हर गांव ऐसा ही फैसला करे. अगले तीन महीने तक वाइन बिक्री को लेकर जनमत जानने की कोशिश की जाए और जनता ने अगर इस फैसले को नकार दिया तो यह फैसला रद्द किया जाए.’

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