एमएसआरटीसी कर्मचारियों द्वारा हड़ताल जारी रखने के बीच राज्य सरकार के कड़े कदमों से बचने के लिए समझदारी से काम लें: अजित पवार

जलगांव : महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के कर्मचारियों द्वारा हड़ताल जारी रखने के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को कहा कि हड़ताली कर्मचारियों को समझदारी से काम लेना चाहिए और काम पर लौट आना चाहिए, न कि उन्हें सरकार को उनके खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर करना चाहिए।

पवार ने यहां मीडियाकर्मियों से कहा कि हड़ताल के कारण लोगों, विशेषकर गरीबों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह (राज्य परिवहन की बसें) गरीबों का वाहन है। फिर भी, (विरोध प्रदर्शन करने वाले) कर्मचारी अड़े हैं। यह सही नहीं है। कर्मचारी हमारे हैं, इसलिए यात्री भी हमारे हैं। उन्हें (प्रदर्शनकारियों को) समझदारी से काम लेना चाहिए।’’

परिवहन मंत्री अनिल परब लगातार आंदोलनकारियों से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन वे अड़े हुए हैं। पवार ने कहा कि परब अब तक कई बार ‘‘नरम’’ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का धैर्य अब समाप्त हो सकता है।

महाराष्ट्र के वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘किसी को भी (सरकार के) धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। सभी कर्मचारियों और कामगारों से मेरा दिल से अनुरोध है। उन्हें काम पर आना चाहिए और काम शुरू करना चाहिए।’’

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता ने प्रदर्शनकारियों से यह भी पूछा कि अगर वे हड़ताल जारी रखते हैं और एक नया भर्ती अभियान शुरू किया जाता है तो क्या उनकी नौकरी की सुरक्षा बरकरार रहेगी।

पवार ने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। मैं प्रदर्शनकारियों से अनुरोध करता हूं कि सरकार को (उनके खिलाफ) कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर न करें।’’

एमएसआरटीसी के अधिकांश कर्मचारी 28 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं। कर्मचारी बेहतर और समय पर वेतन और अन्य लाभ की उम्मीद कर रहे हैं और वे नकदी-संकट से जूझ रहे निगम के राज्य सरकार के साथ विलय की मांग कर रहे हैं।

एमएसआरटीसी 16,000 से अधिक बसों के बेड़े के साथ देश के सबसे बड़े सरकारी परिवहन उपक्रमों में से एक है। यह सामान्य समय में प्रतिदिन 65 लाख से अधिक यात्रियों को ढोता है।

यात्रियों, विशेषकर छात्रों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को हड़ताल के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें निजी ट्रांसपोर्टरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिन्होंने अपने किराए में वृद्धि की है।

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