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महाराष्ट्र विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से अनुरोध किया कि वह 2011 की जनगणना के आंकड़े मुहैया कराए

Maharashtra Assembly passed a resolution requesting Center to provide 2011 census data

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महाराष्ट्र विधानसभा ने सोमवार को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से अनुरोध किया कि वह 2011 की जनगणना के आंकड़े मुहैया कराए, जिससे राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ओबीसी आबादी को लेकर एक अनुभवजन्य आंकड़ा तैयार कर सके, जिसका मकसद स्थानीय निकायों में समुदाय के लिये राजनीतिक आरक्षण को बहाल करने का प्रयास करना है। विपक्षी भाजपा ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे “राजनीति से प्रेरित” करार दिया और आरोप लगाया कि महा विकास आघाडी गठबंधन सरकार आरक्षण के मुद्दे पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है।

विधानसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता और राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल द्वारा पेश प्रस्ताव को विपक्षी भाजपा सदस्यों के हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित किया गया। वहीं विधान परिषद में ग्रामीण विकास मंत्री हसन मुशरिफ ने इस प्रस्ताव को पेश किया। विधान परिषद में भी प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हो गया। इस मुद्दे पर निचले सदन की कार्यवाही को दो बार स्थगित भी करना पड़ा।

भाजपा सदस्य सदन में अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गए और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे, जबकि नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रस्ताव “राजनीति से प्रेरित है और इससे किसी भी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी।’’
मुशरिफ ने परिषद को बताया, “स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण को बहाल करने के लिये एक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एसबीसीसी) गठित किया गया है।

ओबीसी आबादी का आवश्यक सामाजिक, आर्थिक और 2011 की जाति आधारित जनगणना का आंकड़ा केंद्र सरकार के पास उपलब्ध है लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद, जानकारी राज्य सरकार के साथ साझा नहीं की गई।”

उन्होंने कहा कि ओबीसी आबादी की अनुभवजन्य आंकड़ों को तैयार करने के लिहाज से एसबीसीसी के लिये जनगणना के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, “इसलिये विधान परिषद केंद्र से यह अनुशंसा करते हुए प्रस्ताव पेश कर रही है कि वह राज्य सरकार को यह जानकारी उपलब्ध कराए।”

सभापति द्वारा सदन की कार्यवाही को 30 मिनट के लिये स्थगित करने से पहले प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। विधान परिषद में नेता विपक्ष प्रवीन दरेकर (भाजपा) ने बाद में प्रस्ताव को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य केंद्र के पाले में गेंद डाल रहा है।

दरेकर ने संवाददाताओं को बताया, “यह प्रस्ताव दिखाता है कि राज्य सरकार ओबीसी आरक्षण पर कुछ करना नहीं चाहती है और जिम्मेदारी केंद्र पर डाल रही है।”

दरेकर ने कहा कि केंद्र सरकार से अनुभवजन्य आंकड़े मांगने की कोई जरूरत नहीं है, 2011 में जब कांग्रेस की सरकार सत्ता में थी तब हुई जनगणना के आंकड़ों में आठ करोड़ विसंगतियां थीं।

उन्होंने कहा, “ओबीसी आरक्षण के लिये त्रुटिपूर्ण आंकड़ों का इस्तेमाल सही नहीं होगा।”

उच्चतम न्यायालय ने इस साल के शुरू में स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण को रद्द करते हुए कहा था कि अनुसूचित जाति और जनजाति समेत विभिन्न समुदायों के लिये निर्धारित सीटों की संख्या कुल सीटों के 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती।

विधानसभा में फडणवीस ने कहा कि शीर्ष अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग से अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) के राजनीतिक पिछड़ेपन का पता लगाने के लिये अनुभवजन्य जांच करने को कहा था। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि न्यायालय ने जो कहा था, प्रदेश सरकार उस दिशा में कुछ नहीं कर रही है।

फडणवीस ने कहा कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों में “आठ करोड़ त्रुटियां” थीं, जबकि महाराष्ट्र से (जनगणना) आंकड़े में “69 लाख गड़बड़ियां”। उन्होंने कहा कि इसलिए, इसे नहीं दिया गया था।

इस पर भुजबल ने पूछा, “अगर आंकड़े में गलतियां थीं तो इनमें संशोधन और सुधार क्यों नहीं किया गया? आप छह साल तक यह आंकड़ा लिये क्यों बैठे रहे। अगर यह आंकड़ा उज्ज्वला गैस जैसी केंद्रीय योजनाओं के लिये इस्तेमाल किया गया तो ओबीसी (आरक्षण मामले) के लिये इसे क्यों नहीं दिया जा रहा।”

उन्होंने पूछा, 2021 की जनगणना कोविड-19 के कारण शुरू नहीं हुई है, ऐसे में राज्य सरकार ओबीसी आबादी के लिये अनुभवजन्य जांच कैसे शुरू करे? मंत्री ने कहा कि फडणवीस जब मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने एक अगस्त 2019 को नीति आयोग को पत्र लिखकर जनगणना के आंकड़े मांगे थे।

उन्होंने कहा, “आप अनुभवजन्य जांच या आंकड़े जैसे शब्दों से क्यों खेल रहे हैं? हम केंद्र से जनगणना के आंकड़ों की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग से अनुभवजन्य जांच करने को कहा है, जो जनगणना के आंकड़े उपलब्ध कराए जाने के बाद ही की जा सकती है।”

जब पीठासीन अधिकारी भास्कर जाधव ने प्रस्ताव को मतदान के लिये रखा तो भाजपा सदस्य गिरीश महाजन और संजय कुटे अध्यक्ष के आसन के पास चढ़ गए और उनसे बहस की।

इस पर उन्होंने सदन की कार्यवाही को 10 मिनट के लिये स्थगित कर दिया। बाद में जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो सुनील प्रभु (शिवसेना) और नवाब मलिक (राकांपा) ने आरोप लगाया कि भाजपा सदस्यों ने पीठासीन अधिकारी से “बदसलूकी” की और अध्यक्ष के कक्ष में उनसे हाथापाई की। उन्होंने कहा, “उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।”

उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल ने इसके बाद सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिये स्थगित कर दी।बाद में सदन से बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि भाजपा सदस्यों ने पीठासीन अधिकारी से बदसलूकी नहीं की। उन्होंने कहा कि भुजबल ने सदन में तथ्यात्मक जानकारी नहीं दी। फडणवीस ने कहा, “केंद्र सरकार ने अपनी योजनाओं में जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल नहीं किया।

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