महाराष्ट्र को सतर्क रहने की ज़रूरत, तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा अच्छी खबर नहीं- भाजपा नेता नीलेश राणे


Rokthok Lekhani

महाराष्ट्र : अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़ कर जा चुके हैं. तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया है. तालिबानी रविवार को काबुल में घुस गए और इसके बाद अशरफ गनी की सरकार बिखर गई. अशरफ गनी की सरकार द्वारा सत्ता छोड़ते ही वहां मौजूद कई विदेशी नागरिकों सहित बड़ी तादाद में अफगानी नागरिकों ने भी देश छोड़ना शुरू कर दिया. अफगानिस्तान में ज्यादातर दूतावास खाली हो गए. ऐसे में वहां से अपने नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए अनेक देश काबुल एयरपोर्ट पर अपने विमान भेज रहे हैं और उन्हें एयरलिफ्ट कर अपने-अपने देश ला रहे हैं. इस बीच भाजपा नेता नीलेश राणे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को इससे जुड़े खतरे को लेकर अलर्ट किया है.

भाजपा नेता नीलेश राणे ने ट्विट कर उद्धव ठाकरे को अफगानिस्तान में तालिबान राज आने के बाद महाराष्ट्र में खतरे की आशंका जताते हुए सावधान किया है. नीलेश राणे ने खास कर मुंबई के संबंध में चेताया है. उन्होंने सीएम को यह याद दिलाया है कि मुंबई में आतंकवादियों के स्लीर सेल्स होने की चर्चा है. इसलिए महाराष्ट्र सरकार को संभावित खतरों को लेकर अलर्ट रहना चाहिए.

नीलेश राणे ने सीएम ठाकरे को अलर्ट करते हुए ट्विट किया है. ट्विट में लिखा है, ” महाराष्ट्र को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. तालिबान ने अफगानिस्तान में कब्जा कर लिया है. यह भारत के लिए अच्छी बात नहीं है. इस बारे में बहुत चर्चा है कि मुंबई में आंतकवादियों के स्लीपर सेल्स हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तुरंत और गंभीरता से इस पर ध्यान दें.” यह ट्विट करने के बाद नीलेश राणे ने आखिर में एक और वाक्य लिखा है और इस तरह महाराष्ट्र सरकार पर ताने मारने से नहीं चूके. उन्होंने लिखा है, ” बाद में आप कहेंगे कि केंद्र ने बताया नहीं”

नीलेश राणे और नीतेश राणे ये दोनों भाई भाजपा नेता हैं. ये दोनों केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बेटे हैं. ये दोनों भी अपने पिता नारायण राणे की तरह महााविकास आघाडी सरकार के प्रति काफी आक्रामक रुख रखने के लिए जाने जाते हैं. राणे परिवार खास तौर से शिवसेना के प्रति ज्यादा आक्रामक बयान दिया करता है. दरअसल नारायण राणे के राजनीतिक करियर की आधी उम्र शिवसेना में ही बीती है. शिवसेना में रहते हुए नारायण राणे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. बाद में इस परिवार का नाता शिवसेना से टूट गया. इसके बाद यह परिवार कांग्रेस से जुड़ा. इसके बाद नारायण राणे भाजपा में शामिल हुए. उनके साथ-साथ उनके दोनों बेटे भी भाजपा मेें शामिल हो गए.

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