मुंबई की लोकल ट्रेन में एक महिला को बैठने के लिए सीट नहीं दी गई क्योंकि उसने हिजाब पहना था

मुंबई: कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब विवाद किसी मोड़ पर थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले का जहां देशभर में स्वागत किया जा रहा है। वहीं कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इससे इतर मुंबई में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिसे सुनकर आपको हैरानी होगी कि मुंबई जैसे शहर में भी ऐसी मानसिकता के लोग हैं। दरअसल मुंबई की लोकल ट्रेन में एक महिला को सिर्फ इसलिए बैठने के लिए सीट नहीं दी गई क्योंकि उसने हिजाब पहना था। पीड़ित महिला के पति डॉ. परवेज मांडविवाला ने यह आरोप लगाया है। उन्होंने 16 मार्च के दिन हुई इस घटना को ट्वीट किया है।

मांडविवाला ने ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘मेरी पत्नी को आज लोकल ट्रेन में बैठने के लिए जगह नहीं दी गई क्योंकि उन्होंने हिजाब पहना था। हालांकि एक सज्जन व्यक्ति ने मेरी पत्नी के लिए सीट छोड़ दी लेकिन बाकी यात्रियों ने कुछ साड़ी पहनी हुई महिलाओं से उस सीट पर बैठने के लिए कहा। जबकि मेरी पत्नी के साथ एक नवजात भी था। आखिर यह कब रुकेगा? ‘

स मामले पर मुंबई जीआरपी ने खेद जताते हुए पीड़ित परिवार से गुजारिश की है कि वह अपना नंबर साझा करें। ताकि इस मामले के शिकायत दर्ज की जा सके। हालांकि डॉ. परवेज ने पुलिस को ट्विटर पर जवाब देते हुए कहा है कि वे इस मामले में शिकायत नहीं आना चाहते हैं क्योंकि यह गैरकानूनी नहीं अनैतिक है।

मुंबई के एक जाने माने कॉलेज में भी हिजाब, बुर्का या दुपट्टा पहने पर रोक लगाई गयी थी। जब स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स ने इसका विरोध किया तो कॉलेज प्रशासन ने कहा कि यह नियम उन्होंने छात्राओं के साथ हो रही छेड़खानी की घटनाओं को रोकने के लिए उठाया था।