बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में कहा अराजक तत्वों ने ढहायी थी बाबरी मस्जिद

लखनऊ : बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने जोर देकर कहा कि विवादित ढांचे को रामकथा कुंज द्वारा सांकेतिक कार सेवा के निर्देशों की अवहेलना करने वाले अराजक तत्वों ने ढहाया था।

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले के सभी 32 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी करने वाली विशेष सीबीआई अदालत ने बचाव पक्ष के वकील विमल कुमार श्रीवास्तव की 400 पन्नों वाली सभी लिखित और मौखिक दलीलें स्वीकार कर लीं।

अधिवक्ता ने विशेष सीबीआई अदालत को मामले की विभिन्न स्तरों पर हुई सुनवाई के दौरान बताया था कि बाबरी मस्जिद को उन अराजक तत्वों ने ढहाया जो सांकेतिक कार सेवा करने के रामकथा कुंज के निर्देश से सहमत नहीं थे।

उन्होंने बताया कि वारदात के वक्त गर्भगृह में रामलला की मूर्तियां मौजूद थीं, जिन्हें घटना के दौरान पुजारी सत्येन्द्र दास ने बचाया था। इससे जाहिर होता है कि आरोपियों ने मस्जिद ढहाने की कोई साजिश नहीं रची थी।

श्रीवास्तव ने अदालत में दलील दी थी कि सीबीआई द्वारा पेश किये गये गवाहों में से किसी के बयान से जाहिर नहीं हुआ कि आरोपियों का मस्जिद ढहाने का कोई इरादा था, बल्कि वे तो मौके पर शांति बनाये रखने की कोशिश कर रहे थे।

अधिवक्ता ने कहा कि सीबीआई द्वारा सबूत के तौर पर पेश किये गये वीडियो और आडियो कैसेट सीलबंद लिफाफे में नहीं रखे गये थे और न ही उन्हें जांच के लिये प्रयोगशाला भेजा गया था। उन कैसेट से छेड़छाड़ की गयी थी, लिहाजा वे भरोसे के लायक नहीं थे। इसके अलावा सबूत के तौर पर पेश की जा रही अखबारों की कटिंग की मौलिक प्रति भी अदालत को नहीं दी गयी।

श्रीवास्तव ने यह भी दलील दी कि वारदात वाले दिन तक सकारात्मक और धार्मिक मनोदशा से सांकेतिक कार सेवा हो रही थी मगर कुछ अराजक तत्व इस कारसेवा में खलल डालने के इरादे से सक्रिय थे, जैसा कि खुफिया इकाई ने अपनी रिपोर्ट में भी कहा है।

गौरतलब है कि विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह समेत 32 आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में बुधवार को बरी कर दिया।

न्यायालय ने कहा कि सीबीआई इस मामले में कोई निर्णायक सबूत पेश नहीं कर सकी और बाबरी मस्जिद ढहाने वाले कारसेवकों की ढांचे के विध्वंस के इस मामले में आरोपी बनाए गए लोगों से कोई सांठगांठ नहीं थी।

विशेष सीबीआई न्यायाधीश एस. के. यादव अपराह्न 12 बजकर 10 मिनट पर न्यायालय कक्ष में पहुंचे और पांच मिनट के अंदर उन्होंने फैसले का मुख्य भाग पढ़ते हुए सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का निर्णय सुनाया।

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