कोरोना काल में बीवी के जेवर गिरवी और बेटी की एफडी के लिए जमा पैसों से चला रहे हैं स्कूल


Rokthok Lekhani

मुंबई : जहां एक तरफ प्राइवेट स्कूल कोरोना काल में स्टूडेंट्स को फीस की रकम में एक पैसे की भी छूट देने तैयार नहीं हैं। वहीं मुंबई के होली स्टार इंग्लिश स्कूल के युवा स्कूल ओनर ने अपने स्कूल के 65 फीसदी विद्यार्थियों की पूरे साल भर की फीस माफ कर एक मिसाल पेश की है। 35 साल के हुसैन शेख जो मलाड-मालवणी इलाके में होली स्टार इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्रिंसिपल और मालिक हैं।

पेंडमिक में लोगों की खस्ता माली हालत को देखते हुए हुसैन ने अपने 1500 स्टूडेंट्स में से 1000 छात्रों की साल भर की स्कूल फीस माफ की है। इसके अलावा बचे हुए 500 छात्र जो फीस दे सकते थे। उन्हें फीस में मिनिमम 15 से लेकर 50 परसेंट तक कि फीस में छूट दी गई है। साथ ही ज़रूरतमंद स्टूडेंट के पेरेंट्स को स्कूल बुलाकर राशन की किट भी दे रहे हैं, ताकि उनके घर में कोई भूखा नहीं सोए।

इतना ही नहीं अपने गरीब स्टूडेंट्स की पढ़ाई आगे भी चलती रहे। इसलिए स्कूल के बाहर एक सपोर्ट फ़ॉर स्टूडेंट का डोनेशन बॉक्स लगा कर लोगों से अपने ज़रूरतमंद स्टूडेंट के लिए आर्थिक मदद भी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। स्टूडेंट से फीस ना लेने की वजह से स्कूल की माली हालत इतनी खराब हो गई है कि हुसैन ने अपने स्कूल की टीचरों की सैलरी देने और खुद का घर चलाने के लिए अपनी बीवी के गहने को बैंक में गिरवी रख दिया है।

इस काम के लिए उन्होंने अपने टीचरों को भी मनाया कि वो हाफ सेलरी में काम करें, ताकि वो अपने इलाके के गरीब स्टूडेंट्स को आगे भी पढ़ा सकें। हुसैन एनजीओ की मदद से पिछले एक साल से ज़रूरतमंद स्टूडेंट्स और आसपास के गरीब लोगों के घरों में राशन किट पहुंचा रहे हैं।

हुसैन को जब यह पता चला कि स्कूल के तकरीबन 1000 बच्चों के पेरेंट्स स्कूल के संपर्क में नहीं है और वो अपने बच्चे को स्कूल इसलिए नहीं भेज रहे हैं क्योंकि उनके पास फीस भरने के लिए पैसे नहीं हैं। यह जानकारी मिलते ही हुसैन ने अपने टीचरों के साथ बातचीत की और यह तय किया कि वो अपने उन ज़रूरतमंद स्टूडेंट्स की पूरे साल भर की फीस माफ कर देंगे। अब उनका पूरा स्टाफ हर पेरेंट्स को फोन कर बुला रहा है और उन्हें जानकारी दे रहा है कि स्कूल ने उन के बच्चों की पिछले साल की फीस माफ कर दी है और आगे की पढाई के लिए उनसे फिलहाल एडमिशन फीस भी नहीं ली जा रही है।

लोगों की मदद करने के जूनून में हुसैन ने अपनी नवजात बच्ची (जो पिछले साल मई में पैदा हुई थी ) की परवरिश और पढ़ाई के लिए जमा किए गए 8 लाख रुपये भी लोगों के घरों में राशन पहुंचाने के लिए खर्च कर दिए। इन पैसों को हुसैन बेटी के लिए फिक्स्ड डिपाजिट करवाना चाहते थे। इस साल जब लॉकडाउन लगा तो पैसे उन के पास नहीं थे।

उन्होंने अपनी बीवी को समझा बुझाकर मनाया और 1000 स्टूडेंट्स की फीस माफ कर दी और अब उनके गहनों को गिरवी रख कर स्कूल चला रहे हैं। हुसैन का कहना है कि जो भी थोड़ी-बहुत जमा पूंजी थी वो इसी स्कूल से जमा हुई थी। जब हालात सुधरेंगे तब सब ठीक हो जाएगा और कुछ साल में वो बीवी के गहने भी बैंक से छुड़वा लेंगे।

Click to follow us on Google News
Click to Follow us on Google News

Click to Follow us on Daily Hunt

Leave a Reply

Your email address will not be published.