मुम्बई महानगर पालिका का जी उत्तर प्रभाग अवैध निर्माण को रोकने के प्रति कितनी सजग है  , शान से खड़ी है अवैध बिल्डिंग

मुम्बई महानगर पालिका का जी उत्तर प्रभाग अवैध निर्माण को रोकने के प्रति कितनी सजग है , शान से खड़ी है अवैध बिल्डिंग

मनपा अधिकारियों की कारगुज़ारी उजागर करती


शान से खड़ी है अवैध बिल्डिंग

2015 में हो चुकी है एमआरटीपी के तहत एफआईआर, फिर बिल्डिंग बनी कैसे?

मुम्बई महानगर पालिका का जी उत्तर प्रभाग अवैध निर्माण को रोकने के प्रति कितनी सजग है इसका जीता जागता उदाहरण है एक ग्राउंड प्लस चार माले की खड़ी बिल्डिंग जिसके अवैध निर्माणकर्ताओं पर 2015 में ही एमरटीपी एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी पर आज लगभग 5 साल के बाद वह बिल्डिंग शान से खड़ी हो गयी। किसकी परमिशन से पूरी बिल्डिंग खड़ी हुई यह बताने वाला कोई नही है। आधिकारिक रूप से आरटीआई के माध्यम से भी जानकारी मांगी गई पर 20 जनवरी को डाली गई आरटीआई की जानकारी अब तक मनपा की ओर से नही दी गयी।
हम बात कर रहे है जी उत्तर प्रभाग अंतर्गत आने वाले माहिम पश्चिम के बालामिया लेन केंडल क्वीन बिल्डिंग के सामने स्थित ग्राउंड प्लस चार माले की बिल्डिंग की। जिसके निर्माणकर्ता असलम सोराठिया पर 28 अगस्त 2015 को ही मनपा ने एमआरटीपी एक्ट के तहत माहिम पुलिस ठाणे में एफआईआर दर्ज कराई थी असलम ने इस मामले को लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चक्कर लगाए लेकिन उसे कहीं से भी राहत नही मिली। अब स्थानीय मनपा के अधिकारियों की सहायता से इस्माइल की बिल्डिंग शान से खड़ी हो नियम और कानून को मुंह चिढ़ा रही है। आखिर जिस स्ट्रक्चर को बनाने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट तक से राहत नही मिली वह स्ट्रकचर शान से खड़ा कैसे हो गया यह एक गम्भीर सवाल है।
यदि स्थानीय मनपा ने अपने किसी नियम के हवाले से इस बिल्डिंग को परमिशन दी है तो आखिर वह आरटीआई के माध्यम से पूछने वालों को जवाब क्यों नही देती? यह अवैध निर्माणकर्ता से नही बल्कि मनपा जी नार्थ के अधिकारियों से सवाल है।

मनपा जी नार्थ पर कार्यरत अधिकारियों द्वारा आरटीआई के जवाब भी न देना यह दर्शाता है कि ज़रूर कहीं दाल में कुछ काला है। हालांकि पहली निगाह में देखने पर तो पूरी दाल ही काली नज़र आती है।
ऐसा भी नही है कि इस बिल्डिंग के निर्माणकर्ता की कारगुज़ारियों से स्थानीय मनपा के अधिकारी कर्मचारी अनजान हो। 2015 में दर्ज एफआईआर के बयान में तत्कालीन अधिकारी ने साफ साफ कहा था कि हम अनेक बार तोड़क कार्रवाई कर चुके है पर हर बार पुनः अवैध निर्माण यहां पर चालू हो जाता है। अब वही स्ट्रक्चर लगभग 5 साल के बाद पूरी बिल्डिंग की शक्ल में कैसे खड़ा हो गया इसका जवाब तो स्थानीय मनपा अधिकारियों को ही देना चाहिए। क्या वर्तमान सहायक मनपा आयुक्त इस सवाल का जवाब देंगे ??

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