उच्च न्यायालय ने अदालत पर पूर्वाग्रह रखने का आरोप लगाने को लेकर वकील को फटकार लगाई

मुंबई:बंबई उच्च न्यायालय ने जमानत अर्जियों की सुनवाई के दौरान अदालत पर पूर्वाग्रह रखने का आरोप लगाने को लेकर एक वकील को फटकार लगाई । साथ ही, कहा कि इस तरह का आचरण ‘‘गैर पेशेवर’’ है और न्याय प्रदान करने वाली संस्था को दूषित करता है।

न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई की एकल पीठ ने 19 अप्रैल को दीपक कनोजिया नाम के एक व्यक्ति की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह कहा।

अदालत में, सुनवाई के लिए यह विषय पुकारे जाने पर न्यायमूर्ति प्रभुदेसाई ने कनोजिया की वकील अंजलि पाटिल से पूछा कि क्या इस पर सुनवाई करने की कोई तात्कालिकता है।

इस पर, पाटिल ने न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगाना शुरू कर दिया और कहा कि कुछ विषयों एवं कुछ खास अधिवक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

न्यायमूर्ति प्रभुदेसाई ने अपने आदेश में कहा, ‘‘वकील (पाटिल) का कहना है कि अदालत निष्पक्ष नहीं है और पूर्वाग्रह रखती है। उन्होंने यह भी शिकायत की कि वादियों को अदालत से न्याय नहीं मिल रहा। ’’

न्यायमूर्ति प्रभुदेसाई ने अपने आदेश में कहा कि वकील को अपने मुवक्किल के हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और वकील अपने मुवक्किल के प्रति जवाबदेह हैं तथा किसी भी कारणवश विषय के स्थगित होने पर उनकी हताशा समझी जा सकती है।

शुक्रवार को उपलब्ध कराई गई आदेश की प्रति में कहा गया है, ‘‘अदालत का एक अधिकारी होने के नाते किसी अधिवक्ता का यह दायित्व है कि वह अदालत की गरिमा और शिष्टाचार को बनाये रखे। उद्दंडता की कोई जगह नहीं है और अदालत को धमकी देने, किसी न्यायाधीश के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने और न्याय प्रदान करने वाली संस्था को दूषित करने का किसी को लाइसेंस प्राप्त नहीं है।

न्यायमूर्ति प्रभुदेसाई ने कहा कि पाटिल ने खुली अदालत में पक्षपात के आरोप लगा कर अपने अधिकारों की सीमा लांघी है।

आदेश में कहा गया है, ‘‘यह आचरण बहुत ही गैर पेशेवर है और एक अधिवक्ता को शोभा नहीं देता है।’’