मुंबई में बढ़ रहा है संक्रमण, घट रहे हैं लोकल ट्रेन के यात्री

कोरोना के बढ़ते हुए केस को देखते हुए अब रेलवे भी अलर्ट मोड में आ चुकी है। रेलवे प्रशासन को कई माध्यमों से उन लोगों की शिकायतें मिल रहीं हैं, जो यात्रा के दौरान नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। पश्चिम रेलवे को सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायतें मिल रही हैं, जिसमें बताया जा रहा है कि किस तरह लोग ट्रेन में भीड़ के दौरान भी मास्क नहीं पहन रहे हैं। रेलवे ने भी नया साल शुरू होते ही पहले तीन दिनों में पश्चिम रेलवे पर 57 लोगों पर कार्रवाई की है। इस दौरान मध्य रेलवे ने 63 लोगों को पकड़ा है। दिसंबर, 2020 में रेलवे ने 951 यात्रियों पर कार्रवाई की गई थी।

दिसंबर के महीने में क्रिसमस से पहले मुंबई लोकल में यात्रियों की संख्या करीब 60 लाख तक पहुंचने वाली थी, लेकिन पिछले एक सप्ताह में तेज़ी से संक्रमण के केस बढ़ने के साथ ही संख्या घटती हुई दिखाई दे रही है। 5 जनवरी को पश्चिम रेलवे पर करीब 18 लाख, तो मध्य रेलवे पर करीब 26 लाख लोगों ने यात्रा की थी। फिलहाल रोज़ाना यात्रियों की औसत संख्या 44 लाख के आसपास रह गई है।

मुंबई में अब करीब 20 हज़ार संक्रमण के केस आने की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन मनपा की ओर से फिलहाल यात्रा के कोई प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं। शर्त बस यही है कि यात्री डबल वैक्सीन का सर्टिफिकेट दिखाकर टिकट खरीद सकते हैं और उन्हें नियमों का पालन करना होगा। बहरहाल, रेलवे के अनुसार उनकी जितनी राज्य सरकार या मनपा से बैठकें हुईं हैं, उससे यही पता चला है कि यदि अस्पतालों में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ती हैं, तो यात्रा में शर्तें बढ़ाने या प्रतिबंध लगाने की बात की जाएगी।

पिछले साल अप्रैल से दिसंबर तक रेलवे पर करीब 18 हजार लोग बिना मास्क या लापरवाही से मास्क पहने हुए पकड़े गए थे। ये स्थिति केवल मुंबई की थी। इन लापरवाह लोगों से रेलवे ने करीब 26 लाख जुर्माना वसूला था। केवल दिसंबर में मुंबई लोकल में रोजाना औसतन 37 लोग लापरवाही करते हुए पकड़े जा रहे थे। हालांकि, ये औसत कुल यात्री संख्या का एक प्रतिशत भी नहीं, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए इतने लोग भी मुंबई की चाल बिगाड़ सकते हैं। अप्रैल, 2021 में रेलवे ने भारतीय रेलवे नियमों के अंतर्गत स्टेशन परिसरों में थूकने वालों और अब मास्क नहीं पहनने वालों पर कार्रवाई का आदेश दिया था।

जनवरी को पश्चिम रेलवे के लोअर परेल वर्कशॉप में 62 रेलकर्मियों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। ये आंकड़ा और भी बढ़ सकता है, क्योंकि इनके संपर्क में आए लोगों का आरटीपीसीआर किया गया है। टेस्ट की रिपोर्ट देरी से मिलने की वजह से संक्रमण भी फैल रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि 90% लोग बिना लक्षण वाले हैं, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिलने तक पॉज़िटिव या नेगेटिव का पता नहीं रहता है। ये लोग तब तक ड्यूटी करते रहते हैं।

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