बंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ की न्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला ने दिया इस्तीफे

मुंबई : बंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ की न्यायमूर्ति पुष्पा गनेडीवाला के इस्तीफे के बाद नागपुर के विधि वर्ग में नाराजगी व्याप्त है. शुक्रवार से ही न्यायमूर्ति गनेडीवाला ने काम बंद कर दिया. वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार न्यायपालिका ने जिस तरह इस पूरे प्रकरण को हैंडल किया, वह दुर्भाग्यपूर्ण है. वकीलों ने शुक्रवार के दिन को एक स्वर में काला दिन करार दिया है. बताया जा रहा है कि नागपुर खंडपीठ के इतिहास में यह तीसरा मामला है जब किसी अतिरिक्त जज का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया. वकीलों के अनुसार इस प्रकरण से निचली अदालतों के लिए एक नकारात्मक संदेश गया है. खास कर पॉक्सो के मामले में कोई भी कनिष्ठ अदालत आरोपी को जमानत या निर्दोष बरी करने से हिचकने लगेगी. इससे न्यायदान की प्रक्रिया बाधित होगी.

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश समर्थ ने शुक्रवार के दिन को काला दिन करार दिया है. उन्होंने कहा कि न्या. गनेडीवाला के पास आगे 10 साल का करियर था. उन्हें एक होनहार और हिम्मत वाली जज के रूप में पहचाना जाता था. केवल एक फैसले के कारण किसी जज का करियर खराब करना सही नहीं है. उनके विवादित फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था. ऐसे कई फैसले होते है जिन्हें ऊपरी अदालत सुधार देती है. उन्हें जो एक अतिरिक्त वर्ष दिया गया था, उसमें उनके खिलाफ कोई भी बात नहीं थी.

वहीं अधिवक्ता श्रीरंग भंडारकर ने कहा न्या.गनेडीवाला का कार्यकाल आगे न बढ़ाना एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है. ऐसे कोई भी जज नहीं होंगे जिनसे गलतियां नहीं हुई होगी. खास बात यह है कि जब तक कोई जज प्रोबेशन पीरियड में है, तो उसमें हुई भूल-चूक को ऊपरी अदालत को सुधारना चाहिए. न्यायपालिका में ऐसा नियम ही बनाना चाहिए. एक अच्छी जज को एक फैसले के कारण पूरा करियर खराब करना बहुत गलत बात है. इसी तरह हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष अतुल पांडे ने भी कहा कि न्यायपालिका ने एक होनहार जज खो दिया. उन्होंने कहा कि वे न्या.गनेडीवाला के भविष्य की उज्जवल कामना करते हैं.

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