प्रभावशाली आरोपी के सामने माहिम पुलिस लाचार ?

प्रभावशाली आरोपी के सामने माहिम पुलिस लाचार ?

मुंबई : पिछले दो दिन चले महाराष्ट्र विधानमण्डल के शीतकालीन सत्र में सबसे ज़्यादा चर्चा हुई राज्य सरकार द्वारा बलात्कार के खिलाफ लाये गए “शक्ति एक्ट” की, इस एक्ट के तहत राज्य में बलात्कारियों को मौत की सज़ा दी जाएगी। साथ ही बलात्कार के केस में जल्द फैसला हो इसके लिए विशेष अदालत 30 दिनों में पूरे मामले की सुनवाई पूरी करेगी। जिससे पीड़ित को न्याय के लिए लम्बा इंतेज़ार न करना पड़े। एक तरफ तो राज्य सरकार इस पूरी कवायद में लगी है तो वहीं दूसरी ओर इसी महाराष्ट्र राज्य की राजधानी मुम्बई के बीचोंबीच स्थित माहिम की एक महिला ने अपने साथ हुए बलात्कार की घटना की लिखित जानकारी स्थानीय पुलिस को दी है पर इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का साहस भी पुलिस नही कर पा रही है। जबकि महिला राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी से भी जुड़ी है फिर भी लिखित शिकायत को एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी महिला अपनी शिकायत दर्ज होने की बांट जोह रही है।

इस शिकायत पर कार्रवाई करने में पुलिस के हाथ पांव इस लिये फूल रहे हैं क्योंकि जिसके खिलाफ यह शिकायत की गई है वह आरोपी भी अत्यंत रसूखदार है। माहिम स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह ट्रस्ट का ट्रस्टी है, राज्य वक्फ बोर्ड का सदस्य है, महानगर मुम्बई का एक प्रतिष्ठित एमबीबीएस डॉक्टर है और केंद्र व राज्य के अनेक मंत्रियों से उसका रसूख है। ऐसे में माहिम पुलिस उसके खिलाफ शिकायत भी कैसे दर्ज करे??

हम बात कर रहे है डॉ मुदस्सिर निसार लांबे की जिनपर शिवसेना की वाहतूक सेना से जुड़ी एक 33 वर्षीय महिला ने शादी का झांसा देकर बलात्कार का आरोप लगाया है। महिला ने विगत 7 दिसम्बर को की गई अपनी लिखित शिकायत में डॉ लांबे पर आरोप लगाया कि जनवरी से लेकर अब तक वह लगातार शादी का झांसा देकर उसके साथ बलात्कार करते रहे महिला ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि इस बात की जानकारी जब उसके पति को हुई तो उसने तलाक दे दिया। अब डॉ लंबे अपने वादे से मुकर रहे हैं और महिला के सामने कुछ पैसों के लेनदेन कर मामला रफ दफा करने का दबाव बना रहे हैं।

महिला द्वारा लगाए गए आरोप काफी संगीन है पर माहिम पुलिस इतने संगीन मामले पर उदासीन है। या फिर यों कहें कि डॉक्टर की पहुंच के आगे नतमस्तक है। यदि पुलिस विभाग प्रभावशाली लोगों के सामने ऐसे ही नतमस्तक रहेगी तो राज्य सरकार कितने भी कानून बना ले ऐसे संगीन आरोपियों पर कोई प्रभाव नही पड़ेगा।

भले ही पुलिस ने इस मामले पर अब तक हीलाहवाली की हो पर पूरा मामला प्रकाश में आने के बाद डॉक्टर मुदस्सिर लांबे ने अपना एक लिखित बयान जारी कर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है। अब आरोप सही हैं या गलत यह तो पुलिस की जांच में सामने आएगा लेकिन जिस तरह से माहिम पुलिस इस प्रकरण को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रही है उससे पुलिस विभाग पर ही सन्देह होता है कि पुलिस प्रभावशाली लोगों के सामने लाचार है। इस लाचारी से राज्य सरकार का कोई भी कानून बनाने का कोई मतलब नही है।

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