मतदाता सत्यापन का आधुनिकीकरण

कुलिन्दर सिंह यादव

मतदाता सूची को दुरुस्त करने और किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचने के लिए चुनाव आयोग ने देशभर में व्यापक मतदाता सत्यापन कार्यक्रम प्रारंभ किया है | जिसको इलेक्टर्स वेरिफिकेशन प्रोग्राम नाम दिया गया है | यह अभियान 1 सितंबर से 15 अक्टूबर तक पूरे देश में एक साथ चलाया जाएगा | जिसका उद्देश्य वोटर लिस्ट का आकलन और सेल्फ वेरिफिकेशन के माध्यम से मतदाता पहचान पत्र की त्रुटियों को दूर करना है | मतदाता सूची को क्राउडसोर्सिंग के जरिए अपडेट किया जाएगा | वोटर लिस्ट की गड़बड़ी को सुधारने के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण पहल है | मतदाताओं को मतदाता पहचान पत्र में सुधार के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सुविधा भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही हैं |
विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत है | जहां बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक व्यक्ति को अपने पसंदीदा प्रतिनिधि को चुनने का संवैधानिक अधिकार मिला हुआ है | भारत में चुनावी प्रक्रिया को संपन्न कराने की जिम्मेदारी भारतीय निर्वाचन आयोग पर है | कोई भी व्यक्ति जो मतदाता बनने के योग्य है वह छूटने ना पाए और मतदाता सूची में खामियां ना रहे | इसके साथ-साथ अब मतदाता का एक विधानसभा से दूसरे विधानसभा में ट्रांसफर भी ऑनलाइन वोटर हेल्पलाइन एप या भारतीय निर्वाचन आयोग के आधिकारिक वेब पेज पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से किया जा सकेगा | इसके अतिरिक्त ऑफलाइन वेरीफिकेशन की भी सुविधा वोटर सत्यापन सेंटरों के माध्यम से दी जा रही है | ऑनलाइन जनभागीदारी के माध्यम से मतदाता सूची की कमियों को दूर करने से समय और धन दोनों की बचत होगी | अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन जनवरी के दूसरे सप्ताह में किया जाएगा | देश में होने वाले आम चुनावों में कोई मतदाता ना छूटे और मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर सकें, इसके लिए चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची का सत्यापन और प्रमाणीकरण करता रहा है |
मतदाता सूची लोकतांत्रिक भारत की नींव है | जिस पर भारतीय लोकतंत्र खड़ा है | चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची को दुरुस्त करने और नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए अभियान चलाता रहा है | मतदाता पहचान पत्र आज हर भारतीय नागरिक का सबसे बड़ा पहचान पत्र बन चुका है | मतदाता पहचान पत्र ना केवल निष्पक्ष चुनाव कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है | बल्कि इससे चुनावों में जन भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिली है | देश की आजादी के बाद जो सबसे बड़ी ताकत देश के लोगों को मिली वह थी लोकतंत्र की ताकत जिससे चुनाव के जरिए सरकार बनाने का अधिकार लोगों को दिया गया | लोकतंत्र के सबसे बड़े ताकत के साथ कोई खिलवाड़ ना हो और किसी भी परिस्थिति में कोई नागरिक इससे वंचित ना रहे, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं | भारत निर्वाचन आयोग ने 1993 में पहली बार चुनावी तालिका में सुधार करने व चुनावी घोटालों को रोकने के प्रयास में देश के सभी मतदाताओं के लिए मतदाता पहचान पत्र बनाने का आदेश दिया था | बाद में वर्ष 2000 में मतदाता फोटो पहचान पत्र के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए | मतदाता पहचान पत्र की जरूरत 80 के दशक में महसूस की गई | जब फर्जी मतों की बारंबारता चुनावों में बढ़ने लगी थी | आज वोटर आईडी देश के प्रत्येक नागरिक के पास उपलब्ध हैं | अब तक पूरे भारत में 450 मिलियन से ज्यादा मतदाता पहचान पत्र वितरित हो चुके हैं |
आजादी के बाद से मतदान प्रक्रिया का स्वरूप अब तक काफी बदल चुका है | मतदान की प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने और मतदाताओं के अधिकार को मजबूत बनाने के लिए देश के संविधान में कई प्रावधान किए गए हैं | संविधान लागू होने के तुरंत बाद समस्त नागरिकों को मतदान का अधिकार बिना किसी भेदभाव के दिया गया | यह भारतीय संविधान की खूबी है | संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत चुनाव आयोग का गठन किया गया और अनुच्छेद 326 के जरिए वयस्क मताधिकार का अधिकार लोगों को दिया गया | प्रारंभ में मतदान का अधिकार न्यूनतम 21 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को ही था | जिसको बाद में 61 वें संविधान संशोधन के जरिए 18 वर्ष कर दिया गया | संविधान लागू होने के बाद पहला चुनाव 1951-52 में हुआ | बैलेट पेपर आधारित चुनाव होने के कारण इसमें पांच महीने का समय लग गया | बैलट पेपर आधारित चुनाव में मानव संसाधनों की ज्यादा जरूरत, पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव और मतगणना में खामियों के कारण बाद के वर्षों में इलेक्ट्रिक वोटिंग मशीन चर्चा में आई | जिसका पहला इस्तेमाल 1982 में केरल के परुर विधानसभा के 50 बूथों पर किया गया | बाद में दिसंबर 1988 में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में संशोधन करते हुए नई धारा 61A जोड़ दिया गया | जिससे चुनाव आयोग को ईवीएम से वोटिंग कराने का अधिकार मिला | वर्ष 1998 के बाद से आम चुनावों और उपचुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है | वर्ष 2004 के लोकसभा आम चुनाव पूरी तरह से ईवीएम से संपन्न कराए गए | ईवीएम से भारत ने पारदर्शी चुनाव की तरफ लंबी छलांग लगाने के साथ हर चुनाव में मतदाताओं को और सशक्त बनाया है |
हालांकि ईवीएम से मतदान काफी विवादित भी रहा है | लेकिन इस प्रकार की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग ने समय-समय पर आवश्यक कदम उठाए हैं | जिससे चुनाव की निष्पक्षता बनी रहे | यह आवश्यक भी है कि चुनाव आयोग राजनैतिक दलों के आशंकाओं को दूर करें | जिससे सभी का विश्वास भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में बना रहे |

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