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मुंबई पुलिस आयुक्त ने मौलानाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं से बात की, CAA NRC पर दूर किया भ्रम

मुंबई: मुंबई पुलिस आयुक्त संजय बर्वे ने नागरिकता संशोधन कानून 2019 और एनआरसी में मुद्दे पर मुंबई के मौलानाओं और मुस्लिम धर्म-गुरुओं से बातचीत की. मुंबई पुलिस कमिश्नर ने बताया कि किस तरह से नागरिकता संशोधन कानून में 6वां बदलाव किया गया है. बर्वे ने एनआरसी को लेकर भी मुस्लिम समाज में फैले भय और भ्रम को दूर किया.

मुंबई पुलिस आयुक्त ने कहा कि ”कानून व्यवस्था खराब हो ऐसे जुलूस को इजाज़त नहीं दी गई थी लेकिन मुंबई पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान में प्रदर्शन की इजाज़त दी.” पुलिस आयुक्त ने कहा, ”अगस्त क्रांति मैदान में कितने भी लोग आएं, तैयारी मुंबई पुलिस ने की है.” संजय बर्वे ने कहा कि ”अगस्त क्रांति मैदान में मुंबई पुलिस ने जो काम किया, उसकी मिशाल हर जगह दी जा रही है. दिल्ली, यूपी, गुजरात में क्या हुआ आपको पता है. आम लोगों ने मुंबई पुलिस को चाय पिलाई और ज़िंदाबाद के नारे लगाए.” मुंबई पुलिस की पीठ थपथपाने के बाद पुलिस आयुक्त ने मौलानाओं से कहा कि ”आपके पास गुजारिश और ख्वाहिश लेकर आया हूं. मुंबई के अमन, विकास के लिए दो समुदायों में सौहार्द के लिए आया हूं.”

सीएए को समझाते हुए पुलिस कमिश्नर ने कहा कि ”सीएए 2019, 5 बार बदला जा चुका है, यह छठा बदलाव है. पहला संशोधन 1955 में हुआ था. इस तरह समय-समय पर बदलाव हुए. मौजूदा सीएए कानून को और स्पष्ट किया गया.” पुलिस कमिश्नर ने राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि ”मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साफ किया है कि सीएए या एनआरसी से महाराष्ट्र में किसी को दिक्कत नहीं होगी. एनआरसी से देश के नागरिकों के लिए कोई चिंता की बात नहीं है.” इसे समझाते हुए पुलिस कमिश्नर ने बताया कि 1971 युद्ध के समय बांग्लादेश से बहुत से लोग भारत आए. पश्चिम बंगाल, नार्थ ईस्ट के राज्य में बांग्लादेशी आए. एनआरसी के बारे में कोर्ट ने असम में एनआरसी लागू करने को कहा. बाकी देश के किसी हिस्से में कोई एनआरसी का नियम नहीं बना है.

अपना निजी उदाहरण बताते हुए संजय बर्वे ने कहा, ”मेरा जन्म घर में हुआ, मेरे पास कोई बर्थ सर्टिफिकेट नही है. मैं यही पला, बढ़ा, देश की सेवा की. मेरी तरह कई लोग हैं लेकिन हमें चिंता की जरूरत नहीं. देश के नागरिकों पर सीएए और एनआरसी से कोई आंच नही आएगी.” उन्होंने कहा कि ”जब मेरी नागरिकता पर खतरा नहीं तो मुसलमानों को खतरा कैसा. एनआरसी और सीएए के मुद्दे पर लोगों को बहकाया जा रहा है, गलतफहमी पैदा की जा रही है.”

बर्वे ने कहा कि एनआरसी से तकलीफ उसे है जो बाहर के लोग हैं. अफ्रीका से आने वाले लोग यहां अपना पासपोर्ट फाड़ देते हैं. गुनाह में पकड़े जाते हैं, सज़ा काट के बाहर आते हैं तो क्या ऐसे लोगों को खुला छोड़ दें. नाइजीरिया, तंजानिया, सोमालिया के लोग होते हैं. महाराष्ट्र के लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. पुलिस ने उन लोगों को भी चेताया है जो विरोध रैली के लिए इजाज़त मांग रहे हैं. आयुक्त ने कहा कि जो लोग प्रदर्शन करने के लिए अनुमति हमसे मांग रहे हैं उनके बारे में और उनके बैकग्राउंड के बारे में हम अच्छी तरह जानते हैं. आप लोग किसी बहकावे में न आएं और ऐसे किसी भी प्रदर्शन में शामिल न हों जिसकी अनुमति न हो. जुम्मे की नमाज़ के बाद मस्जिद के बाहर हिंदुस्तान की तरक्की के लिए और समाज में खुशहाली के लिए दुआ कीजिए.

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