मुंबई में बकरे परिवहन को लेकर उद्धव ठाकरे सरकार से मुस्लिम समुदाय नाराज !

मुंबई: बकरी ईद 1 अगस्त को है लेकिन यह साल ईद कोरोना महामारी में है | मुंबई में बकरे खरीदने और बकरों को लाने के लिए मुस्लिम लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने मुसलमानों से ऑनलाइन बकरी खरीदने का अनुरोध किया है । लोगो जब ऑनलाइन खरीदी कर रहे है मुंबई के चेक पोस्ट पर पुलिस द्वारा गाड़ियों को वापिस किया जहा रहा है । ऐसे में लोग समाज नही पह रहे है क्या करें मदद केलिए कोई मुस्लिम नेता अग्गे नही आरहा है इसका जिम्मेदार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री है ऐसा बोला जहा रहा है |

बैठक में शरद पवार और अनिल देशमुख के साथ मुस्लिम नेताओं की बैठक हुई, बकरी ईद में बकरे मुंबई में प्रवेश के समस्या के बारे में चर्चा की गई बकरी ईद को लेखर जिसमें यह निर्णय लिया गया था बैठक में अंतिम निर्णय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे लेंगे । लोग लॉकडाउन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की प्रशंसा कर रहे थे, बकरीद ईद नजदीक है और अभी तक कोई उचित दिशा-निर्देश नहीं है, इस कारण से लोग कुर्बानी के लिए मुंबई में बकरे को लाने के लिए पीड़ित हैं | इस कारण से लोग नाखुश हैं कि मुख्यमंत्री उचित निर्देश क्यों नहीं दे रहे हैं जिससे मुस्लिम समुदाय को महामारी का सामना करना पड़ रहा है.

क्या हैं Maharashtra Bakri Eid Guidelines?: राज्य सरकार ने पिछले हफ्ते बकरीद के लिए गाइडलाइंस जारी की थीं, जिसके तहत कोरोना संकट के बीच 31 जुलाई से एक अगस्त के बीच ये पर्व मनाया जाएगा। गाइडलाइंस के अनुसार, लोगों को मस्जिदों के बजाय घरों में नमाज अदा करनी होगी। साथ ही उन्हें बकरों की खरीद फरोख्त फोन या फिर ऑनलाइन करनी होगी।

कांग्रेसी नेताओं के एक समहू ने सीएम ठाकरे से बकरीद की गाइडलाइंस की समीक्षा करने की गुजारिश की थी। बताया गया कि कांग्रेसी नेता नसीम खान ने सीएम को इस बाबत खत भी लिखा था और उनसे मंत्रियों की तत्काल एक बैठक बुलाकर नियमों की समीक्षा करने की मांग की थी। पत्र में कांग्रेसी नेता ने एमएचए की गाइडलाइंस को लेकर नाखुशी भी जाहिर की थी और कहा था कि इस आदेश से जनभावनाएं आहत हुई हैं, लिहाजा सरकार को इस बारे में फिर से सोचना चाहिए।

गाइडलाइंस में यह भी अपील की गई कि इस बार Bakri Eid का सांकेतिक तौर पर जश्न मनाया जाए। राज्य सरकार ने इसके साथ ही कहा कि हो सके तो लोग ‘कुर्बानी’ की परंपरा को सांकेतिक तौर पर निभाएं। वे लॉकडाउन के नियम और कंटेनमेंट जोन्स की पाबंदियों को भी ध्यान में रखें।

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