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एक राष्ट्र एक कार्ड समय की मांग

कुलिन्दर सिंह यादव

हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि देश के नागरिकों के लिए एक बहु उपयोगी पहचान पत्र पर विचार होना चाहिए | उसी के बाद से एक राष्ट्र एक कार्ड विशेषज्ञों के मध्य चर्चा का विषय बन गया है | यह भारत सरकार की बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना होगी | भारत जैसे देश के लिए जो आने वाले वर्षों में जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा देश बनने वाला है | ऐसे में क्या इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए इस प्रकार की योजना को आगे बढ़ाना जिसमें व्यक्ति विशेष की जानकारी सभी संस्थाओं के लिए उपलब्ध हो उचित रहेगा | यह भी अपने आप में एक सवाल है ? भारत सरकार को लोगों को यह भी आश्वस्त करना होगा कि उनकी व्यक्तिगत जानकारियों का दुरुपयोग नहीं होगा और जिस कार्य के लिए किसी कंपनी विशेष को यह जानकारी दी जाएगी | वह जानकारी वहीं तक सीमित रहेगी | भारत में जिस समय आधार का विचार आया था | उस समय भी सुरक्षा चुनौतियों से संबंधित समस्याओं को विशेषज्ञों ने उठाया था | आधार के लागू करने के समय में कहा गया था कि इसका प्रयोग एक कार्ड के रूप में नहीं बल्कि एक नंबर के रूप में होगा | लेकिन आज प्रत्येक व्यक्ति आधार को एक कार्ड के रूप में इस्तेमाल कर रहा है | नंदन नीलकर्णी समिति ने आधार को एक पहचान पत्र के रूप में सभी भारतीय नागरिकों को उपलब्ध कराने का अपना विचार दिया था |
आज भारत में लगभग 10 विभिन्न प्रकार के कार्ड इस्तेमाल किए जा रहे हैं | जिनका प्रयोग भिन्न-भिन्न जरूरतों के लिए हो रहा है | हमें यह समझने की जरूरत है कि क्या आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड और विभिन्न वित्तीय कार्डों को एक कार्ड में समाहित करना संभव हो सकता है ? ड्राइविंग लाइसेंस की बात करें तो यह किसी व्यक्ति को तभी मिल सकता है | जब वह उसकी योग्यता रखता हो, अयोग्य व्यक्ति को भी ड्राइविंग लाइसेंस दिया जाए यह तर्कसंगत नहीं होगा | इसी तरह से पासपोर्ट की बात आती है, पासपोर्ट किसी भारतीय नागरिक को तभी दिया जा सकता है | जब वह उसकी अन्य शर्तों को पूरा करता हो | आपराधिक प्रवृति के व्यक्ति को पासपोर्ट नहीं दिया जा सकता है | इस तरह के कई अन्य कार्ड भी हैं जो प्रत्येक भारतीय नागरिक को नहीं उपलब्ध हो सकते हैं, जब तक कि वह उनकी शर्तों को ना पूरा करता हो | इसलिए यदि गृहमंत्री ने एक राष्ट्र एक कार्ड की चर्चा उपरोक्त परिपेक्ष में किया होगा | तो यह निकट भविष्य में संभव नहीं दिखाई देता है और भारत को इस तरह के किसी भी कार्ड की आवश्यकता भी नहीं है | यहां तक कि विकसित देशों में भी अभी तक इस तरह के किसी भी कार्ड का प्रचलन नहीं है | यह जरूर है कि कुछ यूरोपीय देशों में एकल पहचान पत्र की व्यवस्था है |
लेकिन यदि गृहमंत्री का इशारा संपूर्ण भारत के लिए ऐसे एकल कार्ड का होगा | जिसका उपयोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए, संपूर्ण भारत में परिवहन सेवाओं के लिए, और पहचान पत्र के रूप में किया जा सकेगा, तो यह तर्कसंगत दिखाई पड़ता है | हमें एक और नया कार्ड बनाने के स्थान पर आधार कार्ड के क्षेत्र का विस्तार करना चाहिए | इसमें जन्म से ही लोगों का डाटा इकट्ठा करना चाहिए और व्यक्ति विशेष को यह अधिकार भी देना चाहिए कि वह समय-समय पर अपनी जानकारियों को अपडेट कर सके | यदि जन्म के समय से ही व्यक्ति विशेष का डाटा कार्ड में समाहित किया जाता है | तो इससे अपराधों पर भी लगाम लगाने में सफलता मिलेगी | क्योंकि भारत में बहुत सारे आपराधिक मामलों में अपराधी अपने आप को नाबालिग साबित कराने के लिए फर्जी तरीके से अपनी जन्म तिथि को कम करवा कर अदालत में प्रस्तुत कर देते हैं | जिससे उनके अपराधों के लिए उनको कम दंड मिलता है | इस तरह के कार्ड से आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलेगी और अवैध घुसपैठियों की भी पहचान हो सकेगी | जिससे भविष्य में एनआरसी जैसी किसी गतिविधि की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी | किसी भी राष्ट्र के विकास में जानकारी आधारित निर्णय प्रक्रिया का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है | पिछले दो से तीन दशकों से भारत सरकार ने भी नीतिगत फैसले लेने से पहले संबंधित क्षेत्र से सूचनाओं को एकत्र किया है | जिससे बेहतर परिणाम भी मिले हैं | जब भी कोई नीतिगत फैसला नागरिक अधिकारों को चुनौती देता है | तो उसे न्यायालय के समक्ष जाना ही पड़ता है | उदाहरण के रूप में सरकार द्वारा आधार कार्ड को सभी क्षेत्रों में लागू करने के फैसले को न्यायालय ने सीमित किया था | इस तरह की चुनौतियां दोबारा उत्पन्न ना हो इसलिए भारत सरकार द्वारा सभी पक्षों से बातचीत कर उनकी चिंताओं को दूर करने के बाद ही निर्णय लिया जाना चाहिए | इसके लागू हो जाने के बाद से सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों का सही आंकड़ा आसानी से उपलब्ध हो सकेगा | जिसके आधार पर त्वरित नीतिगत फैसले लिए जा सकेंगे |
व्यक्ति विशेष की लगभग 55 तरह की जानकारियों को इस कार्ड में समाहित करने की बात की गई है |
विशेषज्ञों की मानें तो उससे डाटा सुरक्षा से संबंधित चुनौतियां उभर कर सामने आती हैं | लेकिन हमें यह भी देखना चाहिए की अभी तक आधार के डाटा लीक से संबंधित कोई भी आधिकारिक मामला सामने नहीं आया है | इससे भारत की सुरक्षा तकनीकी में श्रेष्ठता साबित होती है | भारत 21वीं सदी में साइबर सुरक्षा में काफी आगे निकल चुका है | आधार से संबंधित संपूर्ण डाटा का संरक्षण भारत के अंदर ही किया गया है | इसलिए इस तरह की चिंताएं निराधार हैं | लेकिन फिर भी भारत सरकार को डाटा चोरी से संबंधित कठोर कानूनों को बनाने की आवश्यकता है | समग्रता से एक राष्ट्र एक कार्ड के मुद्दे का अध्ययन करने पर वर्तमान समय में मतदाता पहचान पत्र, स्वास्थ्य कार्ड, शिक्षा से संबंधित कार्ड, पैनकार्ड, पासपोर्ट और बैंकिंग से संबंधित कार्डों को एक कार्ड में समाहित करना तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता | लेकिन यदि पूरे देश के लिए कुछ विशेष शर्तों वाले पहचान पत्रों को ( जैसे-पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि ) को अलग कर सरकारी योजनाओं के लिए और पहचान के लिए एक विशेष कार्ड की व्यवस्था की जाती है तो यह उचित रहेगा | भारत सरकार को प्रयास करना चाहिए कि आधार कार्ड के क्षेत्र का ही विस्तार कर नया रूप दिया जा जाए |

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