महाराष्ट्र के शिवसेना नेता अनिल परब को भी ईडी ने किया तलब, शिवसेना सांसद संजय राउत ने ट्वीट किया, ‘शाबास! ऐसी ही उम्मीद थी

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महाराष्ट्र : महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख और अन्य के खिलाफ दर्ज मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिवसेना नेता और राज्य के परिवहन और संसदीय कार्य मंत्री अनिल परब को भी पूछताछ के लिए समन किया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि परब को मंगलवार को दक्षिण मुंबई स्थित ईडी कार्यालय में जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है। इस मामले में ईडी देशमुख को पांच समन जारी कर चुकी है, लेकिन वह पेश नहीं हुए। मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने देशमुख पर 100 करोड़ रुपये की वसूली का आरोप लगाया था जिसके बाद सीबीआइ ने उन पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था और फिर ईडी ने भी मामला पंजीकृत किया था।

ताजा घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने ट्वीट किया, ‘शाबास! ऐसी ही उम्मीद थी, जैसे ही जन-आशीर्वाद यात्रा (केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की) खत्म हुई, अनिल परब को ईडी का नोटिस भेज दिया गया। केंद्र सरकार ने अपना काम शुरू कर दिया है। भूकंप का केंद्र रत्नागिरी था। परब जिले के संरक्षक मंत्री हैं। घटनाक्रम को समझते हैं। कानूनी लड़ाई को कानूनी तरीके से लड़ेंगे।’ दरअसल, यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए थप्पड़ वाली टिप्पणी के लिए नारायण राणे को रत्नागिरी जिले से गिरफ्तार किया गया था। राणे की गिरफ्तारी में कथित भूमिका और आय से अधिक संपत्ति के मामले में भाजपा परब पर निशाना साधती रही है।

महाराष्ट्र विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता प्रवीण दरेकर ने राउत के आरोपों से इन्कार करते हुए कहा कि ईडी के नोटिस का राणे की जन-आशीर्वाद यात्रा के दौरान हुए घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं है। यह नोटिस शायद ईडी के समक्ष दर्ज किसी शिकायत की वजह से भेजा गया है।
कांग्रेस ने रविवार को दावा किया कि 100 करोड़ रुपये के वसूली मामले में सीबीआइ के जांच अधिकारी (आइओ) को अनिल देशमुख की कोई भूमिका नहीं मिली थी और उन्होंने जांच बंद कर दी थी।

लेकिन साजिश के तहत सीबीआइ ने उस रिपोर्ट की अवहेलना की। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआइ साजिश की जांच हो और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने सिर्फ प्रारंभिक जांच के लिए कहा था, लेकिन हाई कोर्ट को गुमराह करके एफआइआर दर्ज करना सीबीआइ का बड़ा गुनाह है। राकांपा प्रवक्ता नवाब मलिक ने मांग की कि सीबीआइ देशमुख के खिलाफ मामले की सही स्थिति बताए।

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