कोस्टल रोड और सड़क परिवहन परिचालन पर विशेष जोर

बीएमसी प्रशासन ने दावा किया था कि कोरोना संकट का विकास कार्यों पर असर नहीं पड़ने दिया जाएगा। लेकिन, वर्ष 2021-22 के बजट में विकास कार्यों के लिए 18750. 99 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, उसमें से सिर्फ 7629.33 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। यह कुल राशि का सिर्फ 40.68 प्रतिशत है। कोस्टल रोड के काम पर बीएमसी का विशेष जोर रहा है। उसके बाद सड़क एवं परिवहन पर सबसे ज्यादा खर्च किया गया है। बीएमसी बजट में प्रस्तावित निधि का इस्तेमाल मार्च तक कर सकती है। वर्ष 2020-21 में विकास कार्यों के लिए 10903 करोड़ रुपये में से 31 मार्च तक बीएमसी ने 9676 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जो कुल राशि का 89 प्रतिशत था। वर्ष 2021-22 के बजट में बीएमसी ने उससे लगभग दो गुने राशि का बजट में विकास कार्यों के लिए प्रावधान किया।
ड्रीम प्रॉजेक्ट कोस्टल रोड का काम तेज गति से चल रहा है। बीएमसी ने कोस्टल रोड के लिए बजट में 2000.07 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, 30 नवंबर तक इस पर 1920.67 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। यानी 96 प्रतिशत राशि बीएमसी कोस्टल रोड के कार्य में खर्च कर चुकी है। इसके बाद सबसे ज्यादा सड़क एवं परिवहन के परिचालन पर बीएमसी ने बजट में 1367.60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, जिसमें 1185.89 करोड़ रुपये यानी बजट का 86.71 प्रतिशत खर्च किया गया।

प्राथमिक स्कूलों की मरम्मत पर विशेष ध्यान दिया गया, जबकि कोरोना काल में लगभग डेढ़ साल स्कूल बंद थे। बजट में इसके लिए 244 करोड़ रुपये रखे गए थे, जिसमें 165.53 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड पर रिंग रोड व फ्लाइओवर के लिए बजट में 1300 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसमें 30 नवंबर तक सिर्फ 29.11 करोड़ रुपये खर्च किए गए। पानी की गंभीर समस्या को सुधारने के लिए तय राशि 1232.17 करोड़ रुपये में से 445.37 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। यानी सिर्फ 36.14 प्रतिशत राशि की पानी आपूर्ति की व्यवस्था पर खर्च की गई
कोरोना संकट से जूझ रही मुंबई में अन्य बीमारियों से निपटने के लिए बजट में 1210.76 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जो विकास कार्यों के लिए रखी गई राशि का 6 प्रतिशत है। लेकिन, इसमें से महज महज 38. 68 प्रतिशत यानि 468.37 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। कोरोना से निपटने पर बीएमसी अब तक 2500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है। हालांकि, बीएमसी को 14 तरह के विकास कार्य पूरे करने थे, जिनके लिए राशि सुनिश्चित की गई थी, लेकिन बीएमसी इस पर खरी नहीं उतरी। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि ठेकेदारों ने विकास योजनाओं में या तो 30 से 40 प्रतिशत अधिक दर पर टेंडर भरा है, या तो 30 से 40 प्रतिशत कम दर पर टेंडर भरा। इस पर काफी विवाद हुआ, जिससे भी विकास कार्य प्रभावित हुए। सड़क विकास एवं मरम्मत का टेंडर इसी विवाद में एक बार रद्द किया गया। फरवरी में प्रस्तावित बीएमसी चुनाव का भी असर इस पर पड़ सकता है।

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