ठाणे के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने पूर्व पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह को दी बड़ी राहत

Rokthok Lekhani

ठाणे : ठाणे के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने शुक्रवार को मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट को रद्द कर दिया है। आपको बता दें परमवीर सिंह पर महाराष्ट्र में कुल 5 रंगदारी के मामले दर्ज हैं। जिनमें से दो ठाणे में हैं।

ठाणे पुलिस ने जबरन वसूली के मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल एसआईटी का गठन किया है। परमवीर सिंह को हाल ही में एक अदालत ने भगोड़ा भी घोषित किया था। कई महीनों तक संपर्क में रहने के बाद गुरुवार को मुंबई पहुंचे उनके पहुंचने के बाद में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उनसे जबरन वसूली के मामले में करीब 7 घंटे तक पूछताछ की।

पिछले महीने रंगदारी के एक मामले में सिंह के और 28 अन्य के खिलाफ रंगदारी के मामले दर्ज किए गए थे। उसी सिलसिले में ठाणे नगर पुलिस स्टेशन पर अपना बयान दर्ज करने आए थे ।

दोपहर करीब 3:00 बजे परमवीर सिंह अपनी कानूनी टीम के साथ थाने कोर्ट गए और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरजे तांबे द्वारा उनके खिलाफ जारी किए गए गैर जमानती वारंट को रद्द करने का आवेदन किया। परमवीर सिंह की तस्वीर (फोटो:सोशल मीडिया) वही एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अदालत ने परमवीर सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट को कुछ शर्तों पर ही रद्द किया है ।

अदालत ने सिंह से कहा कि उन्हें पुलिस को जांच में सहयोग करना होगा। परमवीर सिंह सुबह करीब 10:00 बजे थाने नगर थाने पहुंच चुके थे । सूत्रों के द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक जांच दल को उनका बयान दर्ज करना था। जोनल डीसीपी अविनाश अंबुरे जांच करने के लिए थाने नगर थाने में मौजूद थे।

आपको बता दें ठाणे नगर पुलिस ने इस साल जुलाई में बिल्डर और सट्टेबाज केतन तन्ना की शिकायत के आधार पर परमवीर सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ रंगदारी का मामला दर्ज किया था ।दरअसल शिकायत में तन्ना ने आरोप लगाया था कि जब परमवीर सिंह 2018 और 2019 के बीच थाने के पुलिस आयुक्त थे ,तब उन्होंने और उनके साथ अन्य आरोपियों ने उनसे 1.25 करोड़ रुपए की उगाही की थी।

साथ ही पैसे न देने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।शिकायत के अनुसार तन्ना के दोस्त सोनू जालान से भी इसी तरह से 3 करोड रुपए की उगाही की गयी थी । इस मामले में सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।

सिंह के अलावा सेवानिवृत्त निरीक्षक प्रदीप शर्मा, निरीक्षक राजकुमार कोठमायर और डीसीपी दीपक देवराज भी मामले के आरोपी थे । इस मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है । जिनमें से एक को कुछ ही दिन पहले अदालत से जमानत मिल गई है।”,

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