सदानन्द आश्रम पर चला सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वन विभाग का हथौड़ा।

एम.आई.आलम

मुम्बई से सटे वसई पूर्व के तुंगेश्रवर के पहाड़ पर स्थित “बालयोगी श्री सदानंद महाराज आश्रम” के परिसर में स्थित धर्मशाला को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग ने तोड़ दिया। वन विभाग की इस कारवाई के बाद यहां पर तनाव व्याप्त है।
आश्रम के बाबा जहां समाधि पर बैठ गए तो उनके हज़ारों समर्थकों ने भी तोड़क कारवाई का विरोध किया। हालांकि भारी पुलिस बन्दोबस्त के आगे विरोध प्रदर्शन का कोई असर नही हुआ और वन विभाग ने अपना काम पूरा किया।
उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल श्री राम नाईक भी वहां पर मौजूद रहे। राम नाईक ने अपनी ओर से इन्टरविन याचिका दायर की हुई है जिसपर सुनवाई आज होनी है। जिस कारण राम नाईक ने तोड़क कारवाई स्थगित करने का आग्रह किया पर अदालत से स्टे न होने के कारण प्रशासन ने राम नाईक का आग्रह ठुकरा दिया।
बताया जाता है कि सदानंद बाबा आश्रम लगभग 50-60 साल पुराना है। इस आश्रम के खिलाफ 2004 में पर्यायवरण कार्यकर्ता देवी गोयनका ने शिकायत की थी। 2009 में एक पर्यायवरण अदालत ने इस आश्रम के अवैध निर्माण को तोड़ने का आदेश दिया। जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी। सर्वोच्च अदालत ने 31 अगस्त तक अवैध निर्माण तोड़ने का आदेश वन विभाग को दिया था। इस बारे में सदानन्द बाबा ट्रस्ट के कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने उनका पक्ष सुने बग़ैर आदेश पारित किया था इस लिए ट्रस्ट की ओर से रिव्यू पिटीशन दायर की जा रही है।

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