महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने के अगले दिन यानि बुधवार को कांग्रेस के विधायक जयपुर से वापस मुंबई लौट आए।

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने के अगले दिन यानि बुधवार को कांग्रेस के विधायक जयपुर से वापस मुंबई लौट आए। वे पांच दिन से जयपुर में एक रिजॉर्ट में ठहरे हुए थे। कांग्रेस, राकांपा के साथ इस बात को लेकर बातचीत चल रही है कि सरकार गठन के लिये शिवसेना को समर्थन दिया जाए या नहीं। साथ ही अगर समर्थन दिया जाए तो उसकी शर्तें क्या होनी चाहिये।

वापस लौटने वालों में से एक विधायक ने कहा कि राज्य के कांग्रेस नेतृत्व ने उनसे कहा है कि उन्हें अगले सप्ताह पार्टी के भविष्य के फैसलों के बारे में बताया जाएगा। विधायक ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर पीटीआई-भाषा से कहा, “हम सभी अब घर जा रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “कांग्रेस के सभी 44 विधायकों के “खून में कांग्रेस है” और कोई भी उन्हें खरीद नहीं सकता। उन्होंने कहा, “जो जाना चाहते थे वे पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं।” महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक अनिश्चितता के बीच पिछले पांच दिनों में दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के करीब एक रिजॉर्ट में इन विधायकों को रखा गया था।

इधर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से गठबंधन को अंतिम रूप देने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और बाद में पार्टी के दो शीर्ष नेता अशोक चव्हाण और बालासाहेब थोराट के साथ बैठक की। 24 घंटों में कांग्रेस के साथ दूसरी बैठक करने के बाद ठाकरे ने कहा कि अब सही दिशा में हमारी बातचीत शुरू हो चुकी है। बुधवार सुबह बांद्रा कुरला काम्पलेक्स से निकलते हुए ठाकरे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि- सही समय पर सभी के आगे गठबंधन की घोषणा कर दी जाएगी।

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