दोस्ती खाड़ी देशों से चोट पाकिस्तान पर

कुलिन्दर सिंह यादव

भारतीय प्रधानमंत्री इन दिनों दो खाड़ी देशों संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के दौरे पर थे | भारतीय प्रधानमंत्री के यूएई दौरे की बात की जाए तो इसके अपने आर्थिक और सामरिक महत्व है | यात्रा के आर्थिक महत्व की बात की जाए तो यूएई भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है | यूएई उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनसे भारत का व्यापार संतुलन की स्थिति में है | भारत-यूएई का द्विपक्षीय व्यापार पिछले वित्तीय वर्ष में बीस प्रतिशत बढ़त के साथ साठ बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था | जिसमें भारत का यूएई को निर्यात तीस बिलियन डॉलर का और यूएई का भारत को निर्यात लगभग उनतीस बिलियन डॉलर का था | जिसको वर्ष 2022 तक पचहत्तर बिलियन डॉलर तक बढ़ाने के लिए दोनों देश प्रतिबद्ध हैं | यदि यूएई की तुलना में हम चीन के साथ अपने व्यापारिक आंकड़ों को देखें | तो सरल शब्दों में जितना कुल व्यापार हम यूएई के साथ करते हैं उतना हमारा चीन के साथ व्यापार घाटा है | इन आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2025 तक भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए किस प्रकार से यूएई की आवश्यकता है | भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार इसके लिए भारत में 1.7 ट्रिलियन डॉलर के विदेशी निवेश की आवश्यकता होगी | आने वाले पांच वर्षों में हमें यूएई की संप्रभु निधि से जिसमें आठ सौ बिलियन डॉलर की मुद्रा जो अबूधाबी निवेश प्राधिकरण के अंतर्गत बुनियादी ढांचा में निवेश के लिए सुरक्षित है | उसमें से कम से कम सौ बिलियन डॉलर भारत में निवेश हो इसके लिए भारत सरकार प्रयासरत है |
भारत-यूएई के द्विपक्षीय संबंध आज के समय में सिर्फ व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है | यूएई भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक ,सामरिक साझेदार पिछले चार वर्षों में बन चुका है | आने वाले समय में भी इसी तरह भारत और यूएई के संबंध प्रगाढ़ होते जाएंगे |
भारत-यूएई के संबंधों का अंदाजा जम्मू कश्मीर के हालिया विवाद बात पर यूएई के वक्तव्य से लगाया जा सकता है | जिसमें यूएई उन चुनिंदा देशों में शामिल पहला देश था | जिसने भारत की कश्मीर नीति का समर्थन किया और अनुच्छेद 370 के हटाने को भारत का आंतरिक मामला बताया | इस्लामिक खाड़ी देशों का समर्थन जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर हासिल करना एक बड़ी कूटनीतिक जीत है | जिसके कई निहितार्थ हैं | यूएई कई महत्वपूर्ण इस्लामिक संगठनों का महत्वपूर्ण सदस्य है | जिनमें ओआईसी शामिल है जहां पर पाकिस्तान भारत को संयुक्त राष्ट्र में घेरने के लिए असफल कूटनीतिक चाल चलता रहा है | यूएई का इस तरह जम्मू कश्मीर मुद्दे पर खुलकर सामने आना और भारतीय प्रधानमंत्री को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करना उद्दंड पाकिस्तान को करारा तमाचा है |
यूएई पहले की अपेक्षा वर्तमान समय में भारतीय नीति का प्रत्येक महत्वपूर्ण संगठनों में समर्थन करता है | इसकी पृष्ठभूमि में भारतीय प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि है | यूएई की तीन दशकों के बाद विदेश यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे | पिछली सरकारों ने खाड़ी देशों के साथ सिर्फ और सिर्फ व्यापारिक संबंध बनाकर रखा था | उसी का परिणाम था कि हमें खाड़ी देशों का समर्थन इससे पहले नहीं मिल पाता था | प्रधानमंत्री मोदी की यह तीसरी यूएई यात्रा है | इससे आप वर्तमान भारत-यूएई प्रगाढ़ संबंधों का अंदाजा लगा सकते हैं |
भारत का लक्ष्य वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का है | फिर भी खाड़ी के तेल समृद्ध देश भारत को विश्व के शीर्ष तेल आयातक देश के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार के रूप में देखते हैं | जिसके उदाहरण के रूप में आप हाल ही में सऊदी अरब की कंपनी सऊदी अरामको द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज के तेल व्यापार में बीस प्रतिशत की हिस्सेदारी खरीदने और यूएई द्वारा भारत के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पेट्रोलियम रिजर्व के निर्माण में निवेश को देख सकते हैं |
यूएई भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व शक्ति के रूप में भी देख रहा है, और उसने अपने पहले मंगल मिशन होपप्रोब के लिए भी इसरो से समझौता किया है | यह खाड़ी देशों का पहला अंतरिक्ष मिशन होगा | भारतीय प्रधानमंत्री का बहरीन दौरा भी महत्वपूर्ण है, भले ही भारत और बहरीन के बीच यूएई जैसी व्यापारिक साझेदारी नहीं है | लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहरीन का समर्थन पाने के लिए इस तरह के प्रयासों की आवश्यकता वर्षों पहले महसूस की गई थी | बहरीन और भारत के साथ कई विषयों पर समझौता हुआ है | जिसमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में समझौते के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से संबंधित समझौता महत्वपूर्ण है | भारतीय प्रधानमंत्री के दौरे से प्रभावित होकर बहरीन ने 250 भारतीय कैदियों से संबंधित क्षमादान के फैसले की भी मंजूरी दी |
बहरीन और यूएई ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भारतीय प्रधानमंत्री को सम्मानित कर इस यात्रा को ऐतिहासिक बना दिया है | इसी के साथ भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी सर्वाधिक देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वाले पहले पीएम बन गए हैं | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी तक चार मुस्लिम बहुल देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त कर चुके हैं | इसके साथ ही पिछले दिनों इन्हें संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े पर्यावरण पुरस्कार चैंपियन ऑफ द अर्थ से सम्मानित किया जा चुका है | यह भारत के लिए गर्व की बात है | खाड़ी देशों द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री को सम्मानित करना पाकिस्तान की बड़ी कूटनीतिक हार है | इसी हताशा में पाकिस्तान ने अपने सीनेट का यूएई दौरा भी रद्द कर दिया | जिससे निश्चित है नुकसान पाकिस्तान का ही होने वाला है | जम्मू कश्मीर विवाद के तुरंत बाद खाड़ी देशों का दौरा भारतीय प्रधानमंत्री के सफल कूटनीतिक दृष्टि को बयां करता है | खाड़ी देशों से मधुर संबंध हमारे सामरिक और व्यापारिक हितों के लिए आवश्यक हैं |
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