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मुस्लिम युवक ने हिंदू की जान बचाने के लिए रोजा तोड़ दिया और इंसानियत का फर्ज निभाया।

मुस्लिम के लिए रमजान का पाक महीना बेहद खास होता है। पूरा दिन बिना कुछ खाए-पिए मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं। रोजे के दौरान मुस्लिम युवक ने भाईचारे की मिसाल पेश की है। असम में एक मुस्लिम युवक ने हिंदू की जान बचाने के लिए रोजा तोड़ दिया और इंसानियत का फर्ज निभाया।



इस नौजवान ने इंसानियत के आगे धर्म, जाति, संप्रदाय सबको छोड़ दिया। मुस्लिम युवक ने रोजा तोड़कर हिंदू की जान बचाने के लिए रक्तदान किया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक असम के मंगलदोई के रहने वाले पानुल्लाह अहमद और तापश भगवती दोनों ही ब्लड डोनर्स हैं और ब्लड डोनर्स समूह से जुड़े हैं। दोनों के पास ही गुवाहाटी के एक निजी अस्पताल में ट्यूमर का ऑपरेशन करा रहे मरीज के बारे में फोन कॉल आई। उन्हें पता चला कि अस्पताल में भर्ती धीमाजी के रंजन गोगोई को खून की जरूरत है। पानुल्लाह ने बिना देर किए रक्तदान करने का फैसला किया, लेकिन र क्तदान से पहले उसे खाना खाना जरूरी थी। उसने रोजे के नियम कानून की परवाह किए बिना ही पहले खाना खाया और फिर रक्तदान करके रंजन की जान बचाई।



पानुल्लाह ने इस्लाम के जानकारों से रोजा के दौरान रक्तदान को लेकर पूछा तो उसे पता चला कि इसमें कोई मनाही नहीं है, लेकिन रोजा के दौरान शरीर कमजोर हो जाता है। ऐसे में बिना खाए पिए ब्लड डोनेट करना खुद के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में उनसे रोजा तोड़कर रक्तदान का फैसला किया। दोनों ने ब्लड डोनेट करते हुए अपनी तस्वीर भी साझा की है जो वायरल हो रही है

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