You are currently viewing पराली जलाने की घटनाओं में कमी

पराली जलाने की घटनाओं में कमी

कुलिन्दर सिंह यादव

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार वर्ष 2016 की तुलना में वर्ष 2018 में पराली जलाने की घटनाओं में 41 फ़ीसदी की कमी हुई है | वर्ष 2018 में हरियाणा और पंजाब के पैंतालीस सौ से अधिक गांव पराली जलाने से मुक्त घोषित कर दिए गए हैं इसका अर्थ है कि इस दौरान इन गांव में पराली जलाने की एक भी घटना नहीं हुई है | यह कमी कृषि में मशीनीकरण को प्रोत्साहन देने के साथ पंजाब हरियाणा ,उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में पराली प्रबंधन संबंधी केंद्रीय योजना के क्रियान्वयन के कारण हुई है | वर्ष 2018-19 और 2019-20 में केंद्र सरकार ने वायु प्रदूषण को कम करने और फसल अवशेषों के कृषि क्षेत्र में ही प्रबंधन हेतु सब्सिडी आधारित मशीनरी उपलब्ध करवाने के लिए केंद्रीय क्षेत्रक योजना शुरू की यह योजना पंजाब, हरियाणा ,उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कार्यान्वित की जा रही है | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से इस योजना को लागूू कर रहा है और साथ ही सूचना शिक्षा एवं संचार गतिविधियों के माध्यम से पराली जलाने से होनेे वाली हानियों के प्रति किसानों में जागरूकता पैदा की जा रही है | योजना लागू होने के एक वर्ष के भीतर ही आठ लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर हैप्पी सीडर मशीन तथा शून्य जुताई तकनीक को अपनाया जा चुका है| पराली जलाने से वायु प्रदूषण मृदा निम्नीकरण स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं तथा यातायात में बाधा जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं |
यदि केंद्रीय क्षेत्रक योजना की बात की जाए तो इस योजना को वर्ष 2018 में शुरू किया गया केंद्रीय स्तर पर इस योजना का संचालन कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग द्वारा किया जाता है | इस योजना के लाभार्थियों की पहचान संबंधित राज्य सरकारों द्वारा जिला स्तरीय कार्यकारी समिति के माध्यम से की जाती है इस योजना के तहत संस्था ने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी को किराए पर लेने के लिए कृषि यंत्र बैंकों की स्थापना की | जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान इस योजना का लाभ उठा सकें और वायु प्रदूषण कम करने में अहम योगदान दे सकें इस योजना के तहत किसानों को खेत में ही फसल अवशेष प्रबंधन हेतु मशीनों को खरीदने के लिए पचास फ़ीसदी वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है और खेत में ही अवशेष प्रबंधन हेतु मशीनरी के कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना के लिए परियोजना लागत का अस्सी फ़ीसदी तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की बात की जाए तो यह भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एक स्वायत्तशासी संस्था है इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है बागवानी और पशु विज्ञान सहित कृषि क्षेत्र में समन्वय मार्गदर्शन और अनुसंधान प्रबंधन एवं शिक्षा के लिए यह परिषद भारत का एक सर्वोच्च निकाय है | यदि इसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात की जाए तो कृषि पर रॉयल कमीशन द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का अनुसरण करने हेतु सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1980 के तहत इसका पंजीकरण किया गया था | जबकि 16 जुलाई 1929 को इसकी स्थापना की गई इसका पहले नाम इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च था अब हम बात कर लेते हैं हैप्पी सीडर कि यह ट्रैक्टर के साथ लगाई जाने वाली एक प्रकार की मशीन होती है जो फसल के अवशेषों को उनकी जड़ समेत उखाड़ फेंक देती है |
वर्तमान समय में जहां विश्व के 15 सबसे प्रदूषित शहरों में 14 शहर भारत से हैं ऐसे समय में केंद्रीय क्षेत्रक योजना के माध्यम से जिस प्रकार से पराली जनित वायु प्रदूषण को कम करने में सफलता हासिल हुई है यह स्वागत योग्य है अब हमें आवश्यकता है की इसका विस्तार ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों में किया जाए जिससे कृषि जनित वायु प्रदूषण को शून्य के स्तर पर लाया जा सके और इससे जो मिट्टी की उर्वरता समाप्त होती थी उस पर भी रोक लग सकेगी |
40.jpg

Rokthok Lekhani

Rokthok Lekhani Newspaper is National Daily Hindi Newspaper , One of the Leading Hindi Newspaper in Mumbai. Millions of Digital Readers Across Mumbai, Maharashtra, India . Read Daily E Newspaper on Jio News App , Magzter App , Paper Boy App , Paytm App etc

Leave a Reply