राज्य की सरकारों ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर तैयारी शुरू कर दी

Rokthok Lekhani

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मुंबई: कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने देश के कई राज्यों में जमकर तबाही मचाई है। इस भयंकर महामारी ने कई लोगों का पूरा परिवार खत्म कर दिया तो कई बच्चे बेसहारा हो गए। वहीं, कोरोना की तीसरी लहर ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर में सबसे अधिक बच्चे प्रभावित होंगे। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि तीसरी लहर से बच्चे अधिक प्रभावित होंगे इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है। लेकिन राज्य की सरकारों ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।

कोरोना की दूसरी लहर में सबसे अधिक प्रभावित होने वाले राज्य महाराष्ट्र ने तीसरी लहर की आशंकाओं के मद्देनजर तैयारी कर दी है। इसी के चलते महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में कोरोना की तैयारियों को लेकर बनाई गई टास्क फोर्स के साथ एक मीटिंग की गई। बैठक के दौरान टास्क फोर्स ने चेतावनी देते हुए कहा है कि दो से चार हफ्तों के बीच प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। वहीं, उनका यह भी कहना है कि तीसरी लहर में सबसे अधिक बच्चे प्रभावित होंगे।

इस मीटिंग में यह बात सामने आई कि कोरोना की तीसरी लहर में केसों की कुल संख्या दूसरी लहर में आए कुल केसों की दोगुनी हो सकती है। राज्य में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या आठ से दस लाख तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि मरीजों में 10 प्रतिशत संख्या बच्चों की हो सकती है। डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले आने के बीच ही अब महाराष्ट्र में संभावित तीसरी लहर के लिए तैयारियों को लेकर यह समीक्षा बैठक की गई थी। टास्क फोर्स ने मुख्यमंत्री को बताया है कि बेहद तेज़ी से फैलने वाला डेल्टा प्लस वैरिएंट राज्य में तीसरी लहर ला सकता है।

वहीं, प्रदेश के स्वास्थ्यकर्मियों की मानें तो कोरोना की दूसरी लहर में पहली लहर के मुकाबले अधिक मरीज सामने आए हैं। संक्रमण की दूसरी ने समाज के एक बड़े वर्ग को प्रभावित किया है। स्वास्थ्यकर्मियों ने यह आशंका जताई है कि तीसरी लहर में बच्चे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही अधिकारियों ने चिता जाहिर करते हुए कहा है कि अधिकारियों ने तीसरी लहर में सक्रिय मामलों की संख्या क़रीब 8 लाख तक पहुंच सकती है और इसमें से क़रीब 10 फ़ीसदी बच्चे होंगे। बता दें कि राज्य में पहली लहर में 19 लाख संक्रमण के मामले दर्ज किए गए थे जबकि दूसरी लहर में क़रीब 40 लाख पॉजिटिव केस दर्ज किए जा चुके हैं।

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