राज्यसभा से The Criminal Procedure Bill पास

दिल्ली : राज्यसभा से दण्ड प्रक्रिया शनाख्त विधेयक 2022 (The Criminal Procedure (Identification) Bill, 2022) पास हो गया. लोकसभा से इस बिल को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. इस बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने बिल के बारे में विस्तार से बताया. सबसे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने इस बिल के प्रमुख उद्देश्यों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि बिल लाने के 4 मुख्य उद्देश्य हैं- – कानून की अदालतों में जो मामले जाते हैं, उसमें दोष सिद्धि का प्रमाण बढ़ाना

पुलिस और फॉरेंसिक की कैपैसिटी बिल्डिंग करना – थर्ड डिग्री को हटाकर दोष सिद्धि के लिए साइंटिफिक एविडेंस प्रॉसिक्यूशन एजेंसी को उपलब्ध करना. – डेटा को सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर रखकर, उसे निश्चित प्रक्रिया के तहत साझा करके किसी भी नागरिक की निजता रिस्क में न आए, इस प्रकार का व्यवस्था तंत्र बनाना उन्होंने कहा कि हम किस तरह का क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम चाहते हैं? जिस क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के अंदर हत्या करकर 100 में से 66 लोग बरी हो जाएं, जिस सिस्टम के अंदर बलात्कार करके 100 में से 60 लोग बरी हो जाएं, चोरी करके 100 में से 62 लोग बरी हो जाएं, डकैती करके 100 में से 70 लोग बरी हो जाएं, बाल अपराध करके 100 में से 62 लोग बरी हो जाएं? किसी ने इसपर कोई सुझाव नहीं दिया.

सरकार के हर कदम को राजनीतिक तराजू से तोला जा रहा है’ अमित शाह ने कहा कि क्या हम राजनीति की कोरी चिंता करेंगे. लोकसभा में पक्ष और प्रतिपक्ष होना स्वाभाविक है. हम चाहते हैं कि प्रतिपक्ष मजबूत हो, लेकिन जनता जिसे चाहती है, वही यहां आता है. कोई भी सरकार बनती है, वो विधि से स्थापित होती है और सरकार लोगों के मैंडेट का प्रतिनिधित्व करती है. सरकार के हर काम में शंका खड़ी करना, लोगों को गुमराह करना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है. मैं देख रहा हूं कि सरकार के हर कदम को राजनीतिक तराजू से ही तोला जा रहा है.

ह्यूमन राइट कभी एकतरफा नहीं हो सकता’ उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि कानून जिसे पकड़ता है, उसका भी ह्यूमन राइट होता है. लेकिन जिसकी हत्या होती है, जो घर निराधार हो जाता है, उसके बाल-बच्चों का भी कोई ह्यूमन राइट होता है या नहीं? ह्यूमन राइट कभी एकतरफा नहीं हो सकता. आतंकी घटनाओं में हजारों लोग मारे जाते हैं, तो ह्यूमन राइट सिर्फ आतंकी का नहीं बल्कि मरनेवालों का भी होना चाहिए. गुनाह के विक्टिम का भी ह्यूमन राइट है, सिर्फ गुनहगार का ह्यूमन राइट नहीं है. अगर कानून बनाने वाली संस्थाएं इन दोनों ह्यूमन राइट के बीच संतुलन नहीं बनाएंगी, तो हम किसको बचाना चाहते हैं?

अमित शाह ने कहा कि इस बिल को लाने की एक ही मंशा है कि गुनाहों के प्रमाण को कम किया जाए, सजा के प्रमाण को बढ़ाया जाए, देश की कानून व्यवस्था की स्थिति को सुधारा जाए और देश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ किया जाए. ‘सारा डेटा NCRB के पास यह सुरक्षित रहेगा’ निजता के हनन पर अमित शाह ने कहा कि यह सारा डेटा NCRB के पास आएगा और NCRB के पास यह सुरक्षित प्लैटफॉर्म पर और हार्डवेयर में ही रहेगा.

डेटा के लिए किसी तीसरे पक्ष या निजी एजेंसियों को कोई स्थान नहीं मिलेगा, NCRB ही इसे मैनेज करेगी. NCRB के डेटा भंडारण को सरकार की उच्च से उच्च कक्षा की कमेटी परीक्षण करेगी और डेटा साझा करने के लिए भी एक पद्धति बनाएगी. इसके लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट और इस क्षेत्र के एक्सपर्ट की कमेटी बनेगी. ‘बिल का उद्देश्य किसी की निजता भंग करना नहीं’ गृहमंत्री ने कहा कि क्या हम आगे नहीं बढ़ना चाहते? राजनीति के गुल्ली-डंडे के बीच देश का विचार नहीं करेंगे हम? जनता की सुरक्षा, गुनहगारों को सजा के सवाल पर राजनीति नहीं करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि बिल का उद्देश्य किसी की निजता भंग करना और किसी के मानवाधिकारों का हनन करना नहीं है. इसमें किसी डेटा लीकेज का सवाल नहीं उठता. रूल्स के अंतर्गत इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी. हम सुनिश्चित करेंगे कि राजनीतिक आंदोलन करने वालों को अपना माप न देना पड़े. मगर नेता अगर क्रिमिनल केस में गिरफ्तार होते हैं तो उन्हें अपना माप देना पड़ेगा.

‘इस बिल में ST/ST या माइनॉरिटी शब्द नहीं है’ उन्होंने यह भी कहा कि इस बिल में ST/ST या माइनॉरिटी शब्द नहीं है. किस चश्मे से बिल को पढ़ते हैं. कानून की नजर में सब बराबर है, किसी की जाति या धर्म क्या देखना. फासिस्ट की परिभाषा को अलग मायने देने का काम बंगाल की सरकार ने किया है.