प्रियंका की राजनीति का आधार बनी ‘मामू अमिताभ’ की फिल्म

लखनऊ:
प्रियंका गांधी अपने मामू अमिताभ बच्चन से काफी मुत्तासिर हैं। लगता है फिल्म दीवार उनकी पसंदीदा फिल्म है। तभी तो उन्हें इस फिल्म के डायलॉग तक याद हैं। इस फिल्म के एक मशहूर डायलॉग से प्रेरित हो कर ही उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीति बनायी है। सोनिया गांधी जब इटली से भारत आयी थीं तो इंदिरा गांधी ने उन्हें हरिवंश राय बच्चन (अमिताभ बच्चन के पिता) के घर ठहराया था। यहीं से उनकी शादी हुई थी। हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन ने ही सोनिया गांधी का कन्यादन किया था। इसलिए सोनिया गांधी अमिताभ बच्चन को भाई मानती हैं।

प्रियंका गांधी उन्हें मामू कह कर बुलाती हैं। फिल्म ‘दीवार’ में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर भाई हैं। एक दृश्य में अमिताभ बच्चन कहते हैं- आज मेरे पास बिल्डिंगें हैं, प्रोपर्टी है, बैंक बैलेंस है, बंगला है, गाड़ी है, क्या है तुम्हारे पास ? तब शशि कपूर जवाब देते हैं- मेरे पास मां है। प्रियंका गांधी इस फिल्मी दृष्टांत को याद करते हुए कहती हैं, लोग पूछते हैं उत्तर प्रदेश चुनाव में क्या (मुद्दे) है आपके पास ? तो मैं कहती हूं, मेरे पास बहन है। महिला शक्ति इस बार विधानसभा चुनाव के परिदृश्य को बदलने वाली है।

उत्तर प्रदेश चुनाव में सबसे पहले प्रियंका गांधी ने महिला कार्ड खेला। उन्होंने 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने, बीए पास लड़कियों को स्कूटी और इंटर पास लड़कियों को स्मार्ट फोन देने का एलान कर अन्य दलों को दबाव में ला दिया। अब उनकी देखादेखी भाजपा और सपा भी इस होड़ में शामिल हैं। प्रियंका गांधी कहती हैं, मैं यह देख कर खुश हूं कि आज यूपी में सभी दल महिलाओं की बात कर रहे हैं। मैंने जो शुरू किया उसकी अहमियत अब सबको समझ में आने लगी है। वर्ना पहले तो एक गैस सिलिंडर दे कर वाहवाही लूटी जाती थी। मैं हर जगह मां-बहनों से कहती हूं कि आप अपनी ताकत को पहचानिए। आपको बहुत कुछ मिलना चाहिए जो अभी तक मिला नहीं है। वे अब जग रही हैं। ये तो शुरुआत है। ये सुगबुगाहट तूफान आने से पहली का संकेत है। ये बहनें ही मेरी ताकत हैं। इसलिए अगर कोई पूछता है कि तुम्हारे पास क्या हैं तो मैं कहती हूं कि मेरे पास बहन है।

प्रियंका गांधी लगभग हर चुनावी रैली में नारी शक्ति को जागृत करने के लिए शंखनाद करती हैं। वे महिला कार्ड को हिंदुत्व या टेनी विवाद से अधिक महत्व दे रही हैं। उत्तर प्रदेश का चुनाव उनके लिए एक बहुत बड़ी परीक्षा है। इस परीक्षा में पास होने के बाद ही उनकी राजनीतिक योग्यता प्रमाणित हो पाएगी। इसलिए उन्होंने एक बड़े समूह को अपना टारगेट चुना है। वे आठ महीने से यूपी में डेरा डाले हुए हैं। सड़क पर उतर कर संघर्ष कर रही हैं। प्रियंका गांधी ने महिला वोटरों को जोड़ने के लिए शक्ति संवाद कार्यक्रम की शुरुआत की है। अन्होंने रविवार को रायबरेली में पहला ‘शक्ति संवाद’ किया और आधी आबादी से कांग्रेस के लिए समर्थन मांगा। चित्रकूट में जब उन्होंने शक्ति संवाद किया तो वहां महिलाओं की अच्छी भीड़ जुटी। प्रियंका गांधी को लेकर हर उम्र की महिलाओं में एक उत्सुकता है। उन्हें लग रहा है कि पहली बार कोई नेता उनके बारे में इतनी गंभीरता से बात कर रहा है। प्रियंका का महिला होना भी उनके हक में जा रहा है।

प्रियंका गांधी कहती हैं, कुछ लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या आप 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देकर चुनाव जीत सकती हैं ? ऐसा कर के क्या आप जोखिम नहीं उठा रहीं ? तो मेरा कहना है, कोई कैसे कह सकता है कि महिलाएं चुनाव नहीं जीत सकतीं ? जो महिलाएं राजनीति में आएंगी वे संघर्ष करेंगी क्यों कि जिंदगी की हकीकत उन्हें ज्यादा मालूम है। हो सकता है कि वे पहली बार हार जाएं लेकिन दूसर बार जरूर जीतेंगी। महिलाओं की क्षमता पर जो हंसेगा या उनका मजाक बनाएगा वो खुद मुंह की खाएगा। ऐसी ही कोशिशों से ही परिवर्तन होता है। ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अब एक हिट नारा बन गया है। इस नारे का हर वर्ग और समुदाय की महिलाओं में असर है। इनके उत्साह को देख प्रियंका खुश हैं। इन बहनों के बल पर ही प्रियंका गांधी 2022 का चुनावी रण जीतना चाहती हैं।

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