तुर्की-सीरिया संघर्ष: आतंकवाद को नई संजीवनी

कुलिन्दर सिंह यादव

हाल ही में अमेरिका द्वारा सीरिया के कुछ क्षेत्रों से सेना को वापस बुलाने के तुरंत बाद से ही तुर्की ने सीरिया में एयर स्ट्राइक प्रारंभ कर दी है | तुर्की सीरिया की डेमोक्रेटिक फोर्सेज को आतंकवादी संगठन मानता है | तुर्की द्वारा किए गए इस हवाई हमले में जिसका नाम आप्रेशन पीस स्प्रिंग रखा गया है, कई नागरिकों के हताहत होने की खबर है | इस हवाई हमले के तुरंत बाद से विश्व के कई देशों ने यहां तक कि अमेरिका ने भी सीरिया को चेतावनी दी है | निश्चित तौर पर यदि अन्य प्रभावशाली देशों ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया तो यहीं से एक बार फिर से अंतिम चरण में पहुंचे आतंकवाद को नई संजीवनी मिल जाएगी | जिसका खामियाजा आतंकवाद से पीड़ित देशों को झेलना पड़ेगा | क्योंकि भारत भी आतंकवाद से पीड़ित है, इसलिए इस विवाद पर भारत का बयान भी बेहद अहम है | भारत ने तुर्की के एकतरफा फैसले पर गहरी चिंता जताई है और उससे अपील की है कि वह सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें | भारत के अनुसार ऐसी कार्रवाई क्षेत्र की स्थिरता एवं आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमतर करती है | इस बयान के बाद से भारत तुर्की संबंध निश्चित तौर पर प्रभावित होंगे |

देश के ज्यादातर विशेषज्ञ भारत के इस बयान को तुर्की द्वारा जम्मू कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र महासभा में उठाने के प्रत्युत्तर के रूप में देखते हैं | इसके अतिरिक्त तुर्की ने अन्य वैश्विक मंचों पर भी भारत की खिलाफत की है | इससे पहले भारत ने तुर्की और साइप्रस के विवाद पर भी साइप्रस के समर्थन में अपनी बात रखी थी | यहां पर हमें यह समझने की जरूरत है कि भारत एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति है और अंतर्राष्ट्रीय विवादों पर किसी भी वैश्विक शक्ति का अपना विचार रखना जरूरी होता है | इसलिए भारत सरकार का यह कदम प्रशंसनीय है | इससे पहले कुर्द बलों का अमेरिका ने सीरिया में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उपयोग किया | अमेरिका इन बलों को संरक्षण भी दे रहा था | लेकिन जिस तरह से अमेरिका ने अपने सैनिकों को सीमावर्ती क्षेत्रों से हटाया है | उससे यह स्पष्ट हो गया है कि 21वीं सदी में दो देशों के बीच संबंध सिर्फ और सिर्फ आर्थिक हितों पर आधारित होते हैं | यहां पर कोई भी किसी का स्थाई मित्र या स्थाई शत्रु नहीं होता है | अमेरिका के इस कदम के बाद से उन सभी देशों को अपनी विदेश नीति पर विचार करने की आवश्यकता है जो अमेरिका पर ज्यादा निर्भर रहते हैं |

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान एक बार फिर से ऑटोमन साम्राज्य को स्थापित करना चाहते हैं | इसके लिए वह अपने प्रतिद्वंदी देशों की संप्रभुता का लगातार उल्लंघन कर उनको अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं | तुर्की ने हाल ही में मलेशिया और पाकिस्तान के साथ मिलकर एक इस्लामिक चैनल की शुरुआत करने की भी बात की है | सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद को सत्ता से बेदखल करने का उनका प्रयास असफल रहा है | इसके बाद से तुर्की राष्ट्रपति सीरिया को विभाजित करने की चालें चल रहे हैं और उनकी इस मुहिम में अमेरिका समेत अन्य कई खाड़ी देश उनका समर्थन कर रहे हैं | निश्चित तौर पर सीरिया में हुए एयर स्ट्राइक में अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हुआ है | लेकिन इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने वाला कोई नहीं दिख रहा है | यदि यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में जाता है, तो भी नाटो का सदस्य होने के नाते विश्व के प्रभावशाली देश तुर्की के समर्थन में खड़े रहेंगे और संयुक्त राष्ट्र से भी इसका कोई हल नहीं निकल सकेगा | तुर्की की अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है, मौजूदा परिस्थिति में यदि द्विपक्षीय स्तर से दबाव डाला जाए तो निश्चित तौर पर इसका हल निकल सकेगा |

तुर्की राष्ट्रपति इस एयर स्ट्राइक से जहां एक तरफ अपने आंतरिक हितों को साधने में लगे हैं | वहीं दूसरी तरफ फिर से ऑटोमन साम्राज्य का ख्वाब पूरा करने के लिए भी प्रयास कर रहे हैं | लेकिन परिस्थितियां अब वर्षों पहले जैसी नहीं है | एयर स्ट्राइक के तुरंत बाद से ही विभिन्न देशों ने तुर्की की आलोचना की है, भारत भी उनमें से एक है | भारत के वक्तव्य के बाद एर्दोगान को यह स्पष्ट संदेश मिल गया है कि यदि वह कश्मीर के मुद्दे पर पकिस्तान के विचारों का अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर साथ देंगे तो उनको इस तरह के विरोध का सामना करना पड़ेगा | किसी भी क्षेत्र में अस्थिरता होने पर हथियारों की दौड़ प्रारंभ हो जाती है | जिससे क्षेत्र विशेष का विकास प्रभावित होता है और वहीं से आतंकवाद का भरण पोषण शुरू होता है | ऐसे क्षेत्र आतंकवाद की नर्सरी के रूप में फलते फूलते हैं | इससे जहां फायदा हथियारों का निर्यात करने वाले देशों को होता है वहीं दूसरी तरफ नुकसान आतंक से प्रभावित देशों का होता है | इसलिए समय की आवश्यकता है कि सभी देशों को व्यक्तिगत हितों से परे हटकर किसी भी देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करने वाले कदमों का पुरजोर विरोध करना चाहिए जिससे विश्व में शांति स्थापित रह सके और सभी देश विकास के पथ पर अग्रसर हो सकें |

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